यूरिया, डीएपी का आयात अप्रैल-जनवरी में 63 प्रतिशत बढ़ा

यूरिया, डीएपी का आयात अप्रैल-जनवरी में 63 प्रतिशत बढ़ा

यूरिया, डीएपी का आयात अप्रैल-जनवरी में 63 प्रतिशत बढ़ा
Modified Date: March 20, 2026 / 07:27 pm IST
Published Date: March 20, 2026 7:27 pm IST

नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश के किसानों के लिए यूरिया और डीएपी उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। चालू वित्तवर्ष के अप्रैल-जनवरी के दौरान इन दो प्रमुख पोषक तत्वों का आयात 63 प्रतिशत बढ़ गया है।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध ने वैश्विक उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

हालांकि, आयात में हुई इस भारी वृद्धि का अधिकांश हिस्सा संघर्ष शुरू होने से पहले का है।

उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्तवर्ष 2025-26 के अप्रैल-जनवरी में यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का कुल आयात बढ़कर एक करोड़ 49.4 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 91.7 लाख टन था।

इस अवधि के दौरान यूरिया का आयात 83.3 प्रतिशत बढ़कर 89.3 लाख टन हो गया, जबकि एक साल पहले यह 48.7 लाख टन था।

इसी अवधि में डीएपी का आयात 43 लाख टन से बढ़कर 90.3 लाख टन हो गया।

यूरिया और डीएपी भारत में सबसे अधिक खपत होने वाले दो उर्वरक हैं।

हालांकि, यूरिया और डीएपी का घरेलू उत्पादन वित्तवर्ष 2025-26 के अप्रैल-जनवरी में थोड़ा घटकर 2 करोड़ 84.9 लाख टन रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 2 करोड़ 92.7 लाख टन था।

उक्त अवधि में यूरिया और डीएपी की कुल बिक्री थोड़ी बढ़कर 4 करोड़ 43.9 लाख टन हो गई, जो पहले 4 करोड़ 36.1 लाख टन थी।

अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बिक्री क्रमशः 1 करोड़ 82.5 लाख बोतलें और 1 करोड़ 49.3 लाख बोतलें (500 मिलीलीटर के बराबर) रही।

यूरिया एक भारी सब्सिडी वाला उर्वरक है, जिसकी अधिकतम खुदरा कीमत वर्ष 2018 से 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग (नीम कोटिंग शुल्क और लागू करों को छोड़कर) पर अपरिवर्तित रखी गई है।

उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस सप्ताह संसद में अपने लिखित जवाब में कहा, ‘‘यूरिया की कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’’

सरकार ने कहा कि उर्वरकों की मांग और घरेलू उत्पादन के बीच के अंतर को आयात के जरिए काफी पहले ही पूरा कर लिया जाता है, ताकि पूरे देश में इनकी पर्याप्त और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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