अमेरिकी अदालत ने एसईसी धोखाधड़ी मामले में दायर अदाणी की याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दी

अमेरिकी अदालत ने एसईसी धोखाधड़ी मामले में दायर अदाणी की याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दी

अमेरिकी अदालत ने एसईसी धोखाधड़ी मामले में दायर अदाणी की याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दी
Modified Date: April 8, 2026 / 01:21 pm IST
Published Date: April 8, 2026 1:21 pm IST

न्यूयॉर्क, आठ अप्रैल (भाषा) अमेरिका की एक अदालत ने उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी की उस याचिका पर सुनवाई की अनुमति दे दी है, जिसमें अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) के धोखाधड़ी मामले को खारिज करने की अपील की गई है।

उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी ने अमेरिकी अदालत से प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग की तरफ से दायर प्रतिभूति धोखाधड़ी मुकदमे को खारिज करने का अनुरोध किया था।

अदाणी परिवार के वकीलों की तरफ से दलील दी गई है कि यह मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर है और इसमें किसी भी तरह का गलत कार्य सिद्ध नहीं होता है।

यह कदम तब उठाया गया जब अदाणी और उनके वकीलों ने अदालत में मामले को खारिज करने की याचिका दायर की।

न्यूयॉर्क की पूर्वी जिला अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘अदालत को प्रतिवादियों का पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने शिकायत को खारिज करने से पहले की बातचीत (प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस) करने का अनुरोध किया है। अदालत इस अनुरोध को मंजूरी देती है और दोनों पक्षों को बातचीत का समय तय करने के निर्देश देती है।’

अदाणी के वकीलों ने कहा कि कथित रिश्वत योजना को साबित करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है।

उन्होंने दलील दी कि जिन बयानों को आधार बनाकर यह मामला बनाया गया है, वे कानून की नजर में सजा देने या कार्रवाई करने योग्य नहीं हैं।

यह मामला नवंबर, 2024 में शुरू हुआ था। इसमें अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया गया था कि अदाणी समूह ने भारत में सौर बिजली के ठेके लेने के लिए भारतीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रिश्वत देने की कोशिश की। आरोप यह भी है कि जब उन्होंने इसके लिए पैसे जुटाते समय अमेरिकी निवेशकों और बैंकों को इस पूरी योजना की जानकारी नहीं दी।

अदाणी समूह ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

समूह ने कहा कि उसके किसी भी संगठन या अधिकारियों पर अमेरिकी विदेशी भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कोई आरोप नहीं लगे हैं। साथ ही, वित्तपोषण जुटाने वाली उनकी नवीकरणीय ऊर्जा इकाई अदाणी ग्रीन एनर्जी, इस मामले की प्रक्रिया में शामिल नहीं है।

गौतम अदाणी, अदाणी समूह के चेयरमैन हैं, जबकि सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक हैं।

समूह के वकीलों ने अदालत को बताया कि 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड की बिक्री अमेरिका के बाहर की गई थी और इसमें अमेरिकी नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

याचिका में यह भी कहा गया कि इस मामले में किसी भी निवेशक को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि 2024 में बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर सभी निवेशकों को मूलधन और ब्याज का पूरा भुगतान कर दिया गया था।

अदाणी की कानूनी टीम का कहना है कि चूंकि पूरा मामला भारतीय प्रतिवादियों, भारतीय कंपनी और भारत में हुए आचरण से संबंधित है, इसलिए यह अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के दायरे से बाहर है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब अदाणी समूह 30 अप्रैल, 2026 तक मामले को पूरी तरह खारिज करने के लिए अपना पक्ष मजबूती से पेश कर सकेगा।

याचिका के अनुसार, अदाणी ग्रीन ने बॉन्ड के सभी हिस्से अमेरिका के बाहर बेचे थे। उन बिक्री का एक छोटा हिस्सा, जिसमें अदाणी ग्रीन पक्ष नहीं थी। बाद में अन्य कंपनियों के जरिये ये अमेरिका के निवेशकों तक पहुंचे।

वकीलों ने कहा कि रिपोर्ट में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि गौतम अदाणी ने बॉन्ड जारी करने को मंजूरी दी या अमेरिकी निवेशकों के लिए कोई निर्देश दिया।

अदाणी के वकीलों का यह भी कहना है कि यह मामला पूरी तरह भारत का है, क्योंकि जारी करने वाली कंपनी भारतीय है और सारा काम भी भारत में ही हुआ है।

उन्होंने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी कानून यहां लागू नहीं होते।

वकीलों ने यह भी दलील दी कि कंपनी ने जो अपनी साख या अच्छी नीतियों के बारे में बातें कही थीं, वे केवल सामान्य प्रशंसात्मक बातें थीं, जिन्हें धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि एसईसी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है कि अदाणी का इरादा किसी को धोखा देने का था।

अदाणी की टीम 30 अप्रैल, 2026 तक इस मामले को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव पेश करेगी।

अदाणी के वकीलों ने अदालत को बताया है कि वे इस सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उन्होंने अंत में यही दोहराया कि सागर अदाणी के खिलाफ भी कोई ठोस सबूत नहीं है और एसईसी के दावे अमेरिकी कानूनों के हिसाब से गलत हैं।

अदाणी की कानूनी टीम ने दलील दी है कि यह अमेरिकी क्षेत्राधिकार का मामला नहीं है और अमेरिकी प्रतिभूति कानून के तहत भी इसमें कार्रवाई योग्य चीजें स्थापित नहीं होती हैं।

इस मामले में गौतम अदाणी का प्रतिनिधित्व सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने किया, जबकि सागर अदाणी की पैरवी निक्सन पीबॉडी एलएलपी और हेकर फिंक एलएलपी कर रही हैं।

भाषा योगेश अजय

अजय


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