वोडाफोन आइडिया को राहत: अगले छह वर्ष में वार्षिक भुगतान 124 करोड़ रुपये तक रहेगा सीमित

वोडाफोन आइडिया को राहत: अगले छह वर्ष में वार्षिक भुगतान 124 करोड़ रुपये तक रहेगा सीमित

वोडाफोन आइडिया को राहत: अगले छह वर्ष में वार्षिक भुगतान 124 करोड़ रुपये तक रहेगा सीमित
Modified Date: January 9, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: January 9, 2026 5:53 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) कर्ज में डूबी संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया को सरकार ने राहत देते हुए अगले छह वर्ष में बकाया राशि को चुकाने के लिए वार्षिक भुगतान की सीमा 124 करोड़ रुपये तय कर दी है, जिससे निकट भविष्य में नकदी प्रवाह में आसानी होगी।

वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) से प्राप्त एक सूचना का हवाला देते हुए शेयर बाजार को बताया कि मार्च 2032 और मार्च 2035 के बीच वार्षिक भुगतान की राशि को घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।

इसमें कहा गया कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की शेष राशि का भुगतान मार्च 2036 से शुरू होकर छह वर्षों तक वार्षिक रूप से समान किस्तों में करना होगा।

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सरकार ने वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) के 87,695 करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया पर रोक लगाने पर 31 दिसंबर को सहमति जतायी थी जिसे संकटग्रस्त कंपनी को वित्त वर्ष से 2031-32 से 2040-41 तक चुकाना होगा।

भुगतान अनुसूची के विवरण सामने आने के बाद वोडाफोन-आइडिया के शेयर में सुबह के कारोबार में नौ प्रतिशत की तेजी आई। हालांकि दोपहर तक विश्लेषकों द्वारा 5जी विस्तार योजनाओं के लिए आवश्यक धन की जरूरतों को लेकर सतर्कता बरतने के कारण शेयर ने अपनी अधिकतर बढ़त खो दी। बीएसई पर शेयर दो प्रतिशत की गिरावट के साथ 11.27 रुपये पर बंद हुआ।

इन कदमों से दूरसंचार कंपनी में 48.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सरकार के हितों की रक्षा होगी। साथ ही स्पेक्ट्रम नीलामी शुल्क और एजीआर बकाया के रूप में केंद्र को देय राशि का व्यवस्थित भुगतान सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, वीआईएल इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा में बनी रहेगी और उसके 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।

एजीआर बकाया का तात्पर्य समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के आधार पर दूरसंचार कंपनियों द्वारा सरकार को देय भुगतान से है। यह वह राजस्व है जिस पर दूरसंचार संचालकों को लाइसेंस शुल्क एवं स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान करना होता है। इसमें सभी राजस्व शामिल हैं यहां तक ​​कि गैर-दूरसंचार आय (जैसे ब्याज, किराया, परिसंपत्ति बिक्री) भी।

कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि इन बकाया राशियों के अलावा, वर्ष 2017-18 और 2018-19 के एजीआर बकाया जिन्हें सितंबर 2020 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर अंतिम रूप दिया गया था..अब बिना किसी बदलाव के 2025-26 से 2030-31 वित्तीय वर्ष में चुकाने होंगे। यह वार्षिक भुगतान 124 करोड़ रुपये बनता है।

वोडाफोन-आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है जिसका मुख्य कारण कड़ी मूल्य प्रतिस्पर्धा, भारी कर्ज एवं एजीआर की परिभाषा में बदलाव के कारण उत्पन्न भारी एजीआर देनदारियां हैं। कंपनी लगातार घाटे, घटते ग्राहक आधार और नेटवर्क विस्तार में निवेश करने की सीमित क्षमता से जूझ रही है जबकि प्रतिद्वंद्वी कंपनियां 4जी और 5जी नेटवर्क को तेजी से पेश कर रहे हैं।

कुछ लोगों को उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल एजीआर बकाया का कुछ हिस्सा या शायद पूरा ही माफ कर देगा। हालांकि इसके बजाय, मंत्रिमंडल ने बकाया राशि पर रोक लगाने का फैसला किया जिससे कंपनी को समय मिल सके।

वोडाफोन-आइडिया अगले 10 वर्ष में सरकार को 1,144 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। शेष समायोजित सकल राजस्व बकाया जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर कर दिया है का भुगतान मार्च 2036 से शुरू करेगी।

कंपनी ने कहा कि हालांकि 31 दिसंबर तक 2006-07 से 2018-19 की अवधि के लिए मूलधन, ब्याज, जुर्माना एवं जुर्माने पर ब्याज सहित संपूर्ण एजीआर बकाया राशि को रोक दिया जाएगा और विभिन्न किस्तों में देय होगी।

भाषा निहारिका पाण्डेय

पाण्डेय


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