छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ रुपये के इनाम वाले 108 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ रुपये के इनाम वाले 108 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

छत्तीसगढ़ में 3.95 करोड़ रुपये के इनाम वाले 108 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
Modified Date: March 11, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: March 11, 2026 4:09 pm IST

(परिवर्तित डेटलाइन से)

जगदलपुर (छत्तीसगढ़), 11 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बुधवार को सुरक्षा बलों के सामने 3.95 करोड़ रुपये के इनाम वाले 108 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि माओवादियों की ‘दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी)’ के कैडरों ने जिला मुख्यालय जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया।

प्रतिबंधित भाकपा (माओवादियों) के डीकेएसजेडसी समूह ने पहले बस्तर में कई जानलेवा हमले किए हैं।

सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से प्राप्त सूचना तथा अन्य सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए एके-47, इंसास, एलएमजी, बीजीएल सहित कुल 101 घातक हथियारों की बरामदगी विभिन्न ‘डम्पों’ से की, जो नक्सल विरोधी अभियानों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक ही स्थल से सर्वाधिक 3.61 करोड़ रुपये नगद तथा 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलोग्राम सोना माओवादियों के ‘डम्प’ से बरामद किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि ‘‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’’ की पहल से प्रभावित होकर राज्य में पिछले 26 महिनों में कुल 2714 माआवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

सुंदरराज ने बताया कि ‘दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी’ के पश्चिम बस्तर डिवीजन के डीवीसीएम राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी और झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के डीवीसीएम रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के डीवीसीएम मल्लेष, पीएलजीए बटालियन नंबर एक के कमांडर मुचाकी, आंध्र-उड़ीसा बार्डर के डीवीसीएम कोसा मण्डावी जैसे प्रमुख नक्सल कैडर ने आज आत्मसमर्पण किया।

अधिकारी ने बताया कि माओवादियों के ‘डम्प’ से सात एके -47, 10 इंसास रायफल, पांच एसएलआर रायफल, चार एलएमजी रायफल, 20 .303 रायफल, 11 बीजीएल लांचर्स सहित कुल 101 हथियार बरामद किये गये हैं।

सुंदरराज ने कहा कि बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों का हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवादी विचारधारा अब कमजोर पड़ चुकी है और संगठन के भीतर भी उसके औचित्य पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल से प्रभावित होकर अनेक कैडर शांति और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं तथा भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीतियों के अनुरूप उन्हें सुरक्षा, पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस बीच, राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार का मकसद 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करना है।

शर्मा ने रायपुर में संवाददाताओं से कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले 108 कैडर में से छह डिवीज़नल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम), तीन कंपनी प्लाटून कमेटी कमांडर, 18 पीपीसीएम (प्लाटून पार्टी कमेटी मेंबर), 23 एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम ) और 56 पार्टी सदस्य हैं।

उन्होंने बताया कि बीजापुर के 37, दंतेवाड़ा के 30, सुकमा के 18, बस्तर के 16, नारायणपुर के चार और कांकेर के तीन माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

शर्मा ने कहा कि लगातार माओवादी विरोधी अभियान और सरकार की नीतियों की वजह से माओवादी तेज़ी से हिंसा छोड़ रहे हैं, जो उन्हें शांति से जीने का मौका देती है।

भाषा संजीव राजकुमार

राजकुमार


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