बस्तर में 35 नक्सलियों ने समर्पण किया
बस्तर में 35 नक्सलियों ने समर्पण किया
रायपुर, 31 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में मंगलवार को 35 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार की वामपंथ उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को खत्म करने की 31 मार्च की समय सीमा से ठीक कुछ घंटे पहले हुआ।
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि इनमें से 25 कैडर माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े थे और उनमें 12 महिलाएं हैं।
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि इन नक्सलियों ने बीजापुर जिले में पुलिस की ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत आत्मसमर्पण किया है।
उन्होंने बताया कि इन 25 नक्सलियों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है।
उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है जिसके तहत बीजापुर में माओवादियों के ठिकानों से 93 हथियार, 2.90 करोड़ रुपये नकद और 7.20 किलोग्राम सोना बरामद किया गया है, जिसकी कीमत लगभग 11.16 करोड़ रुपये है।
पुलिस महानिरीक्षक ने इसे देश में नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में माओवादियों से बरामद की गई अब तक की सबसे बड़ी कीमती चीजों की जब्ती बताया है।
इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में माओवादियों के ठिकानों से 5.37 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई थी—जिसमें 1.64 करोड़ रुपये का एक किलोग्राम सोना और 3.73 करोड़ रुपये नकद शामिल थे।
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि इस बरामदगी के साथ, कुल बरामदगी बढ़कर 19.43 करोड़ रुपये हो गई है, जिसमें 6.63 करोड़ रुपये नकद और 12.80 करोड़ रुपये का 8.20 किलोग्राम सोना शामिल है।
पुलिस के अनुसार बरामद किए गए हथियारों में चार एके-47 राइफलें, नौ एसएलआर राइफलें, एक इंसास एलएमजी (लाइट मशीन गन), सात इंसास राइफलें, एक कार्बाइन, 12 .303 राइफलें, एक आठ एमएम पिस्तौल, सात सिंगल-शॉट हथियार, 23 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, तीन .315 बोर राइफलें और 14, 12-बोर बंदूकें शामिल हैं।
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि बीजापुर में जिन प्रमुख कैडरों ने समर्पण किया, उनमें कंपनी कमांडर मंगल कोरसा उर्फ मोटू (42) और आकाश उर्फ फागू उइके (38), डिविजनल कमेटी सदस्य शंकर मुचाकी (33) शामिल हैं तथा इन सभी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम है।
उन्होंने कहा कि समर्पण करने वाले एरिया कमेटी सदस्य पाले कुरसम उर्फ कमली कुरसम (40) पर पांच लाख रूपए का इनाम है।
इससे पहले बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले में डीकेएसजेडसी से जुड़े पांच माओवादियों ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने समर्पण कर दिया था , जिन पर कुल नौ लाख रुपये का इनाम था।
पट्टलिंगम ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान भैरमगढ़ एरिया कमेटी के सदस्य पांच लाख रूपए के इनामी सोमे कडती (42) तथा एक—एक लाख रूपए के इनामी चार पार्टी सदस्य लखमा ओयाम (19), सरिता पोड्याम (21), जोगी कलमू (20) और मोती ओयाम (19) के रूप में हुई है।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर, पुलिस ने क्षेत्र में माओवादियों के ठिकानों से 40 हथियार बरामद किए। इनमें आठ एसएलआर राइफलें, तीन इंसास राइफलें, एक कार्बाइन, एक .303 राइफल और पांच बीजीएल लांचर शामिल है।
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि इससे अब कमजोर पड़ चुके इस संगठन की सैन्य क्षमताओं को एक बड़ा झटका लगा है।
वहीं क्षेत्र के सुकमा जिले में, दो नक्सलियों — जनीला उर्फ मड़कम हिड़मे (लगभग 30) और सोनी (24) — ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन दोनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम है।
पट्टलिंगम ने बताया कि जिले में माओवादियों का एक ठिकाना भी खोज निकाला गया, जिससे 10 लाख रुपये नकद, एक इंसास एलएमजी, दो एक-47 राइफलें, तीन .303 राइफलें और गोला-बारूद बरामद हुआ।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही कांकेर जिले में दो नक्सलियों शंकर (प्लाटून पार्टी समिति सदस्य) और हिडमा डोडी (प्लाटून सदस्य) ने भी सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। नक्सलियों ने पुलिस को एक एके-47 राइफल सौंपा है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर में, बिजलू मंडावी (26) ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है, जो जिले में आखिरी सक्रिय हथियारबंद नक्सली था और उस पर एक लाख रुपये का इनाम था।
अधिकारियों ने बताया कि यह आत्मसमर्पण जिला रिज़र्व गार्ड (डीआरजी), ज़िला पुलिस, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, स्पेशल टास्क फोर्स, सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन और सशस्त्र बलों की दूसरी टुकड़ियों की मिली-जुली कोशिशों का नतीजा था।
पुलिस महानिरीक्षक ने कहा, ‘‘हम एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां नक्सल-मुक्त बस्तर और छत्तीसगढ़ का सपना सच होता दिख रहा है। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन वह जारी रहेगा। आने वाले दिन और भी ज़्यादा सकारात्मक और शांतिपूर्ण होंगे।’’
उन्होंने कहा कि दशकों की हिंसा के बाद, बस्तर अब एक शांतिपूर्ण भविष्य की ओर बढ़ रहा है तथा आने वाले समय में इसे इसके विकास, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं के लिए और भी ज़्यादा जाना जाएगा।
भाषा सं संजीव राजकुमार
राजकुमार

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