माओवादी हिंसा को समाप्त करने का बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है : मुख्यमंत्री साय

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है : मुख्यमंत्री साय

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है : मुख्यमंत्री साय
Modified Date: January 26, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: January 26, 2026 4:54 pm IST

बिलासपुर, 26 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को कहा कि माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे समाप्त करने का बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि सुनियोजित रणनीति और सुरक्षा बलों के साहस और शौर्य से मार्च तक राज्य को माओवाद से मुक्त कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने शहीद सैनिकों और पुलिस जवानों के परिजनों को सम्मानित किया तथा छत्तीसगढ़ पुलिस बल को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक देने की घोषणा की।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने कहा, ‘‘माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती है। इनकी आस्था संविधान में नहीं है, न ही राष्ट्र की अस्मिता तथा इसके प्रतीक चिन्हों में है। इस कैंसर की तरह व्याधि का उपाय यही है कि इसे जड़ से नष्ट किया जाए।”

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने माओवाद के खिलाफ सुनियोजित रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे जवानों ने रात-दिन कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में हर पल खतरे का सामना करते हुए एरिया डोमिनेशन किया और अपने साहस तथा शौर्य से हर लक्ष्य को प्राप्त किया। माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़ से मुक्त कर देंगे।”

साय ने कहा कि यह खुशी की बात है कि अनेक भटके हुए लोग अब हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों ने हथियार रखकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान को अपनाया है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के देश में यह दृश्य संविधान की ‘सत्यमेव जयते’ भावना को सशक्त करता है।

साय ने बस्तर क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली महिलाएं अब ‘बस्तर कैफे’ का संचालन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा छोड़कर सेवा और रोजगार की राह पर आए लोगों के चेहरों पर दिखने वाली खुशी नए बस्तर की पहचान है। उन्होंने कहा कि नक्सल मुक्त क्षेत्रों में विकास का सूरज दमक रहा है और बच्चों के हाथों में अब किताबें हैं।

राज्य की रजत जयंती पर आत्मावलोकन की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ समाज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद सबसे बड़ी चुनौती किसानों का सुख और संतोष था, जिसे सरकार ने प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के किसानों को धान का बेहतर मूल्य मिल रहा है। साय ने कहा कि धान खरीदी का आंकड़ा राज्य गठन के समय पांच लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से डेढ़ लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में अंतरित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के गठन के दो वर्ष पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में ही 18 लाख आवास स्वीकृत किए थे। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में 26 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और प्रतिदिन लगभग दो हजार आवासों का निर्माण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य की स्थापना से पहले, प्रदेश के लोगों को घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ता था। विद्युत उत्पादन के मामले में हम अभी नंबर दो पर हैं और पहले स्थान की ओर तेजी से अग्रसर हैं। आज प्रदेश के बीपीएल परिवारों को ‘एकल बत्ती योजना’ के तहत निःशुल्क बिजली तथा अन्य परिवारों को रियायती दरों पर 24 घंटे बिजली मिल रही है।’’

उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित बस्तर में अब विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को पक्का घर दिया जा रहा है और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘पीएम जनमन योजना’ के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 33 हजार से अधिक आवास मंजूर किए गए हैं।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत करीब 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है और अब तक 23 किश्तों में 14 हजार 948 करोड़ रुपये माताओं और बहनों के खाते में अंतरित किए जा चुके हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अब 15 मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो चुके हैं और एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में शुरू की गई है। साय ने कहा कि आईआईटी की तर्ज पर राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत द्वारा 2036 ओलंपिक की दावेदारी किये जाने के मद्देनज़र छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में 85 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 13 एकड़ में राष्ट्रीय आर्चरी एकेडमी स्थापित की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की नई औद्योगिक नीति से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। साय ने कहा कि एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर यूनिट, आईटी, फार्मा और मेडिसिटी के जरिए नवा रायपुर को प्रौद्योगिकी व स्वास्थ्य सुविधा के प्रमुख केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है।

नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों के बलिदान को सम्मान देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कार्यरत समस्त बल को सम्मान स्वरूप राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक प्रदान किया जाएगा।

भाषा संजीव

मनीषा दिलीप

दिलीप


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