छत्तीसगढ़ : बस्तर में विशेष अभियान के तहत 8,241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध अधिकार
छत्तीसगढ़ : बस्तर में विशेष अभियान के तहत 8,241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध अधिकार
रायपुर, 20 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राज्य सरकार द्वारा फौती नामांतरण मामलों के निपटारे के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत 8,241 परिवारों को उनकी जमीन पर वैध अधिकार प्राप्त हुआ है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, जिले में पिछले चार वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों के निस्तारण के लिए इस वर्ष जनवरी से विशेष अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य मृत व्यक्तियों की भूमि से संबंधित अभिलेखों में उनके वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराना था।
फौती नामांतरण वह राजस्व प्रक्रिया है, जिसके द्वारा किसी भूमि या संपत्ति के मूल मालिक (खातेदार) की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति को कानूनी उत्तराधिकारियों (वारिसों) के नाम पर सरकारी दस्तावेजों (खसरा, खतौनी) में दर्ज किया जाता है।
उन्होंने बताया कि कई परिवारों को इस कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था कि परिवार के मुखिया की मृत्यु के वर्षों बाद भी भूमि के सरकारी अभिलेखों में उनका ही नाम दर्ज रहता था। इससे परिवारों को विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में परेशानी होती थी। जिला प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय पहल की।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान की शुरुआत गांव स्तर से की गई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत हुए लोगों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने उन मामलों की पहचान की, जिनमें मृत व्यक्तियों के नाम पर भूमि दर्ज थी और फौती नामांतरण आवश्यक था। कोटवारों ने गांव स्तर पर जानकारी का सत्यापन किया, जबकि तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी की।
उन्होंने बताया कि जिले के 611 गांवों से जानकारी एकत्र की गई। ग्राम सचिवों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई थी। इनमें से 8,651 ऐसे मामले पाए गए, जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी।
अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार की संयुक्त टीमों ने घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र की। जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं थे, उनके लिए प्रमाणपत्र बनवाए गए। साथ ही, उत्तराधिकारियों का विवरण और वंशवृक्ष तैयार कर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
उन्होंने बताया कि अभियान के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 410 मामलों पर कार्रवाई जारी है। यह अभियान जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में संचालित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, ‘‘सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बस्तर में चलाया गया यह विशेष फौती नामांतरण अभियान इसी सोच का परिणाम है। जिन परिवारों के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके उत्तराधिकारियों को समय पर उनका अधिकार मिले, यह हमारी प्राथमिकता है।’’
साय ने कहा कि हजारों परिवारों के भूमि अभिलेख अद्यतन होने से उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े, बल्कि प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचा।
बस्तर के जिलाधिकारी आकाश छिकारा ने कहा कि जिले के दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भूमि संबंधी कार्यों के लिए लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई परिवार केवल इस कारण परेशान होते थे कि भूमि अभिलेखों में मृत व्यक्ति का नाम दर्ज था।
छिकारा ने कहा, ‘‘विशेष अभियान के माध्यम से प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचा और इस समस्या का समाधान किया। अब हजारों परिवारों के भूमि अभिलेख सही हो गए हैं, जिससे उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने, बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ने में आसानी होगी।’’
छिकारा ने कहा कि इस पहल से न केवल लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा, बल्कि भूमि संबंधी विवादों में भी कमी आएगी और ग्रामीणों का जीवन अधिक सरल बनेगा।
भाषा
संजीव रवि कांत

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