छत्तीसगढ़: नसबंदी के बाद 12 महिलाओं की मौत के मामले में एक चिकित्सक को दो साल का कारावास

छत्तीसगढ़: नसबंदी के बाद 12 महिलाओं की मौत के मामले में एक चिकित्सक को दो साल का कारावास

छत्तीसगढ़: नसबंदी के बाद 12 महिलाओं की मौत के मामले में एक चिकित्सक को दो साल का कारावास
Modified Date: March 18, 2026 / 03:15 pm IST
Published Date: March 18, 2026 3:15 pm IST

बिलासपुर, 18 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की एक अदालत ने 2014 में नसबंदी सर्जरी के बाद 12 महिलाओं की मौत के मामले में एक चिकित्सक को दो साल की सजा सुनाई है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव सोमवार ने बुधवार को बताया कि प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शैलेष कुमार केतारप की अदालत ने मंगलवार को चिकित्सक आर. के. गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई।

अभियोजन ने बताया कि अदालत ने प्रत्येक महिला की मौत के लिए 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

उन्होंने कहा कि साथ ही, डॉ. गुप्ता को अन्य आरोपों में भी सजा सुनाई गई है, जिसमें एक धारा के तहत छह महीने की सजा और 500 रुपये का जुर्माना, और दूसरी धारा के तहत एक महीने की सजा और 100 रुपये का जुर्माना शामिल है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

मामला 8 नवंबर 2014 को बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक में सकरी गांव के पास पेंडारी स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित नसबंदी शिविर से संबंधित है, जिसमें आसपास के ग्रामीण इलाकों से 83 महिलाओं को नसबंदी की सर्जरी के लिए लाया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार उस समय जिला अस्पताल में वरिष्ठ सर्जन रहे डॉ. गुप्ता ने तीन घंटे में सभी सर्जरी कर दी थीं।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि ऑपरेशन के बाद, महिलाएं बीमार हो गईं और उन्हें बिलासपुर के जिला अस्पताल और छत्तीसगढ़ चिकित्सा विज्ञान संस्थान (सीआईएमएस) समेत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां 12 महिलाओं की मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऑपरेशन में लापरवाही से सेप्टीसीमिया संक्रमण होने और ऑपरेशन के बाद दी गईं ‘सिप्रोसिन’ दवा में चूहामार रसायन की मिलावट को लेकर भी विवाद सामने आया था।

जांच के बाद, पुलिस ने डॉ. गुप्ता और दो औषधि आपूर्ति कंपनियों महावर फार्मा कंपनी के रमेश और सुमित महावर, और कविता फार्मास्यूटिकल्स के राकेश, राजेश व मनीष खरे समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। हालांकि, अदालत ने दवा कंपनियों से जुड़े पांचों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि चूंकि गुप्ता को सुनाई गई सजा तीन साल से कम है, इसलिए अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें जमानत दे दी।

भाषा सं संजीव जोहेब

जोहेब


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