छत्तीसगढ़ ने यूनेस्को नामांकन की दिशा में बढ़ाया कदम, सिरपुर में पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन

छत्तीसगढ़ ने यूनेस्को नामांकन की दिशा में बढ़ाया कदम, सिरपुर में पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन

छत्तीसगढ़ ने यूनेस्को नामांकन की दिशा में बढ़ाया कदम, सिरपुर में पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन
Modified Date: November 20, 2025 / 07:19 pm IST
Published Date: November 20, 2025 7:19 pm IST

रायपुर, 20 नवंबर (भाषा) कभी दक्षिण कोसल की राजधानी रही और ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टि से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के सिरपुर (प्राचीन नाम श्रीपुर) में विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधा केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के महासमुंद जिले स्थित सिरपुर में आधुनिक सुविधाओं के निर्माण के साथ यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि इसके प्रस्तावित विश्व धरोहर के लिए नामांकन को देखते हुए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व बना रहे।

राजधानी रायपुर से लगभग 85 किलोमीटर दूरी पर बसा सिरपुर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के कारण आकर्षण का केंद्र हैं।

यह पांचवी से आठवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कोसल की राजधानी थी।

सिरपुर महानदी के किनारे पर बसा हुआ है और बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के करीब है।

यह स्थान बौद्ध विहारों और सातवीं सदी के मशहूर लक्ष्मण मंदिर के लिए जाना जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि सिरपुर के सभी स्मारक और पुरातात्विक स्थलों का एक संयुक्त निरीक्षण इस महीने की शुरुआत में किया गया था, जिससे इसके प्रस्तावित विश्व धरोहरों में नामांकन को देखते हुए यहां के ऐतिहासिक स्थलों के सतत विकास की समीक्षा की जा सके।

‘स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (एसएडीए) सिरपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धम्मशील गणवीर ने ‘पीटीआई—भाषा’ को बताया कि इसका मकसद इलाके की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से समझौता किए बिना आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का निर्माण करना है।

बलौदाबाजार वनमंडल के अधिकारी गणवीर ने यह भी कहा कि विश्व धरोहर के लिए नामांकन का प्रस्ताव लगभग छह महीने पहले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय भेजा गया था।

उन्होंने बताया कि सिरपुर में सभी 34 पहचाने गए स्मारक और पुरातात्विक स्थलों के प्रबंधन को आसान बनाने तथा पर्यटकों के अनुभवों को बेहतर बनाने के लिए चार ‘थीमैटिक क्लस्टर’ में बांटा जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि हर क्लस्टर में ठहरने की व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था, संकेतकों, रास्ते और स्वच्छता जैसी जरूरी सुविधाएं होंगी।

गणवीर ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ऐसे स्थलों, जिसके बारे में लोगों को अपेक्षाकृत कम जानकारी है, से मुख्य मार्ग के बीच आवागमन को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है, जिससे पर्यटकों की पहुंच और अनुभवों में काफी सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि सिरपुर में कम जाने-माने वाले स्थलों को बेहतर बनाने और उस तक लोगों की पहुंच को आसान करने में एएसआई की कोशिशें ‘बहुत अच्छी और शानदार’ हैं।

अधिकारी ने बताया कि सिरपुर में बुधवार से विश्व धरोहर सप्ताह भी मनाया जा रहा है ताकि भारत की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके और इसके बचाव में समाज की भागीदारी को मजबूत किया जा सके।

भाषा संजीव जितेंद्र

जितेंद्र


लेखक के बारे में