छत्तीसगढ़ में वेदांता ऊर्जा संयंत्र में हुए धमाके मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हुई

छत्तीसगढ़ में वेदांता ऊर्जा संयंत्र में हुए धमाके मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हुई

छत्तीसगढ़ में वेदांता ऊर्जा संयंत्र में हुए धमाके मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हुई
Modified Date: April 18, 2026 / 07:54 pm IST
Published Date: April 18, 2026 7:54 pm IST

रायपुर, 18 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता विद्युत संयंत्र में हुए धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि 12 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है।

सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि शनिवार सुबह अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान दो और घायल मजदूरों की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि उनमें से एक की पहचान सुब्रत कुमार जाना के रूप में हुई, जिसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। दूसरे व्यक्ति की पहचान उपेंद्र साह के रूप में हुई, जिसे रायपुर के कालडा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अधिकारी ने बताया कि जाना पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर का रहने वाला था और साह झारखंड के गढ़वा का।

अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में दोनों लगभग 90 प्रतिशत जल गए थे।

धमाका 14 अप्रैल को सिंघीतराई गांव में स्थित वेदांता लिमिटेड के विद्युत संयंत्र में हुआ था।

पुलिस ने बताया था कि इस मामले में वेदांता कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेन्द्र पटेल समेत 10 जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस बीच, उद्योगपति नवीन जिंदल ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कहा कि किसी भी जांच से पहले ही अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”छत्तीसगढ़ में हुई यह त्रासदी बेहद दुखद है। 20 परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया। परिवारों के लिए उचित मुआवजा, आजीविका सहायता और गहन जांच के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन, किसी भी जांच से पहले ही प्राथमिकी में श्री अनिल अग्रवाल जी का नाम शामिल करना गंभीर चिंताएं पैदा करता है।”

उन्होंने कहा, “वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपनी मेहनत से सफलता पाई है। वह एक साधारण और पिछड़े समुदाय से आते हैं, जिन्होंने जमीन से उठकर एक वैश्विक स्तर का उद्यम खड़ा किया।”

जिंदल ने कहा, “उस प्लांट के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। जब पीएसयू प्लांट्स या रेलवे में दुर्घटनाएं होती हैं, तो क्या हम चेयरमैन का नाम प्राथमिकी में डालते हैं? हम ऐसा नहीं करते। यही मापदंड निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए। पहले जांच करें। सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय करें। उसके बाद ही कोई कार्रवाई करें।”

जिंदल ने कहा, ”विकसित भारत विजन को श्री अनिल अग्रवाल जैसे लोगों की ज़रूरत है, जो लगातार निवेश करते रहें और निर्माण कार्य जारी रखें। ऐसा तभी संभव है, जब निवेशकों का इस व्यवस्था पर भरोसा हो।”

भाषा संजीव

जोहेब

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