छत्तीसगढ़ के कांकेर में आईईडी विस्फोट में डीआरजी के चार जवानों की मौत

छत्तीसगढ़ के कांकेर में आईईडी विस्फोट में डीआरजी के चार जवानों की मौत

छत्तीसगढ़ के कांकेर में आईईडी विस्फोट में डीआरजी के चार जवानों की मौत
Modified Date: May 2, 2026 / 07:33 pm IST
Published Date: May 2, 2026 7:33 pm IST

कांकेर, दो मई (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक आईईडी विस्फोट में ‘जिला रिजर्व गार्ड’ (डीआरजी) के एक अधिकारी समेत चार जवानों की मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

राज्य को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद नक्सल गतिविधियों से जुड़ी विस्फोट की यह पहली घटना है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार छोटेबेठिया थानाक्षेत्र में कांकेर-नारायणपुर जिले की सीमा के पास सुरक्षाबलों को बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने और गश्त के लिए भेजा गया था।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के आदनार गांव के जंगल में बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने के अभियान के दौरान दुर्घटनावश विस्फोट हो जाने से तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।

उन्होंने बताया कि घायल जवान को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मृत्यु हो गई।

बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से प्राप्त जानकारी तथा अन्य सूचना के आधार पर बस्तर क्षेत्र में माओवादियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए सैकड़ों आईईडी को पुलिस और सुरक्षाबलों ने बरामद कर निष्क्रिय कर दिये हैं।

सुंदरराज ने बताया कि शनिवार का अभियान छोटेबेठिया इलाके में माओवादियों द्वारा छोड़ दिये गये सामानों (डंप) के बारे में मिली इसी तरह की जानकारियों के बाद शुरू किया गया था।

उन्होंने बताया कि डीआरजी के नेतृत्व वाले इस दल में बस्तर फाइटर्स और जिला बल के जवान भी शामिल थे।

महानिरीक्षक ने बताया कि अभियान के दौरान दल ने सबसे पहले एक (माओवादी) ‘डंप’ खोज निकाला और वहां से नक्सलियों का सामान बरामद किया।

उन्होंने कहा कि पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे इस दल को एक और ‘डंप’ मिला, जहां जमीन के नीचे एक आईईडी छिपाकर रखा गया था।

उन्होंने बताया कि जब जवान आईईडी को निष्क्रिय करने के लिए उसे बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी वह फट गया।

सुंदरराज ने बताया कि इस घटना में दल का नेतृत्व कर रहे डीआरजी के निरीक्षक सुखराम वट्टी (40), जिला बल के आरक्षक कृष्णा कुमार कोमरा (35), और बस्तर फाइटर्स के आरक्षक संजय गढ़पाले (29) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

उन्होंने बताया कि इस घटना में घायल हुए बस्तर फाइटर्स के एक आरक्षक परमानंद कोर्राम (29) को हवाई मार्ग से रायपुर ले जाया गया था, लेकिन वहां अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार निरीक्षक वट्टी बीजापुर जिले के रहने वाले थे, जबकि बाकी तीन जवान कांकेर जिले के थे।

महानिरीक्षक ने बताया कि मौके पर एक बम निरोधक दस्ता भी मौजूद था तथा पहली नज़र में ऐसा लगता है कि आईईडी को निकालते समय गलती से सर्किट जुड़ जाने के कारण उसमें धमाका हो गया होगा।

उन्होंने बताया कि धमाके के सही कारण का पता लगाने के लिए विस्तृत बैलिस्टिक और फोरेंसिक जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना को ‘दुखद’ बताया और कहा कि पूरी सरकार शहीद जवानों के परिवारों के साथ मज़बूती से खड़ी है।

शर्मा ने नवा रायपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्होंने डिवाइस को तय प्रक्रिया के अनुसार ही संभाला, लेकिन उसकी बनावट ऐसी थी कि उससे एक ज़ोरदार धमाका हो गया, जिसमें चार जवान शहीद हो गए। यह एक बहुत ही दुखद घटना है।’’

शर्मा ने कहा, ‘‘ मैं ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। पूरी सरकार शोक संतप्त परिवारों के साथ मज़बूती से खड़ी है।’

छत्तीसगढ़ में 31 मार्च को नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा के बाद बारूदी सुरंग विस्फोट में जवानों की मौत की यह पहली घटना है।

राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, खासकर बस्तर क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों ने पूर्व में बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, जो अब भी वहां तैनात सुरक्षाबलों और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षाबल के जवान क्षेत्र में लगातार बारूदी सुरंगों की तलाश और उन्हें निष्क्रिय करने की कार्रवाई में जुटे हुए हैं।

भाषा सं संजीव राजकुमार

राजकुमार


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