शह मात The Big Debate: हड़ताल..इस्तीफा..बयान.. किसान कैसे बेचेंगे धान? धान खरीदी को लेकर गरमाई सियासत! क्या हड़ताल से निकलेगा समस्या का हल?

हड़ताल..इस्तीफा..बयान.. किसान कैसे बेचेंगे धान? Paddy procurement has started in Chhattisgarh from Saturday November 15

शह मात The Big Debate: हड़ताल..इस्तीफा..बयान.. किसान कैसे बेचेंगे धान? धान खरीदी को लेकर गरमाई सियासत! क्या हड़ताल से निकलेगा समस्या का हल?
Modified Date: November 18, 2025 / 12:03 am IST
Published Date: November 17, 2025 11:54 pm IST

 

रायपुरः छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर शनिवार से धान खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन उससे भी पहले से धान खरीदी समिति में कर्मचारियों और कम्प्यूटर ऑपरेटर्स की हड़ताल शुरू हो चुकी है। एक तरफ 17 हजार हड़ताली कर्मचारी और उनकी 4 प्रमुख मांगे तो दूसरी तरफ हैं 25 लाख से ज्यादा किसान अपनी उपज लेकर धान बेचने पहुंचने लगा है। सरकार का इस साल करीब 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का टार्गेट है, लेकिन कर्मचारियों के अपनी मांगों पर डटकर विरोध करने से धान खरीदी अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। सरकार का दावा है कि सबकुछ कंट्रोल में है, बेहतर है, ठीक से चल रहा है तो फिर बाहर कर्मचारी और केंद्रों के भीतर किसान क्यों परेशान है?

15 नवंबर से छत्तीसगढ में धान की सरकारी खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन असल में जिन कर्मचारियों को धान खरीदी केंद्रों पर सारी व्यवस्था बनानी है, वो अनिश्चित काल के लिए हड़ताल पर हैं। 3 नवंबर से प्रदेश के 17 हजार कर्मचारी 4 सूत्रीय मांगों पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। मांगों पर सरकार से बातचीत भी हुई, लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला। धान खरीदी की व्यवस्था बनाने प्रशासन ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाया,सख्ती दिखाते हुए कुछ कर्मचारियों की बर्खास्तगी हुई लेकिन कर्मचारी अपनी हड़ताल पर डटे रहे। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दिया और कल यानी मंगलवार को पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन करने की घोषणा की है।

इधर, नाराज कर्मचारियों का समर्थन करते हुए विपक्ष ने फिर आरोप लगाया कि, असल में सरकार धान खरीदना नहीं चाहती। प्रदेश भर में किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। जवाब में प्रदेश के कृषि मंत्री का दावा है कि 15 नवंबर से प्रदेशभर में धान खरीदी सुचारू रुप से जारी है। तंज कसा कि कांग्रेसी सस्ती लोकप्रियता बयान से माहौल बनाना चाहते हैं।

कुल मिलाकर हड़ताली कम्प्यूटर ऑपरेटर और कर्मचारियों का गुस्सा अधूरे वादों को लेकर है। पिछली सरकार ने इन्हें पूरे साल भर का वेतन दिया जिसे मौजूदा सरकार ने काम कि मुताबिक 6 महीने का कर दिया और पिछली बार विरोध होने पर आगे विचार का भरोसा दिया। इसीलिए इस बार कर्मचारी आर-पार के मूड में हैं। सामूहिक इस्तीफा देकर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिये हैं। सरकार का दावा है कि वैकल्पिक इंतजाम हैं, पटवारी समेत कृषि विभाग के कर्मचारियों धान खरीदी में लग चुके हैं। आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर भी तैनात हो चुके हैं, लेकिन सबको पता है कि धान खरीदी ने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ी है क्या ये व्यवस्था पर्याप्त होगी? सवाल ये भी क्या कर्मचारियों की मांगे सही नहीं है, अगर हैं तो फिर इनपर निर्णय में देर क्यों ?


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।