बस्तर पर से ‘लाल आतंक’ का साया हटा, सुविधा केंद्रों में बदले जाएंगे सुरक्षा शिविर: शर्मा

बस्तर पर से 'लाल आतंक' का साया हटा, सुविधा केंद्रों में बदले जाएंगे सुरक्षा शिविर: शर्मा

बस्तर पर से ‘लाल आतंक’ का साया हटा, सुविधा केंद्रों में बदले जाएंगे सुरक्षा शिविर: शर्मा
Modified Date: March 25, 2026 / 06:06 pm IST
Published Date: March 25, 2026 6:06 pm IST

जगदलपुर (छत्तीसगढ़), 25 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को कहा कि बस्तर क्षेत्र और राज्य का अन्य हिस्सा काफी हद तक ‘लाल आतंक’ के चंगुल से बाहर निकल आया है और अब लगभग 400 सुरक्षा शिविरों को सुविधा केंद्रों में बदलने की योजना पर काम जारी है।

बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में स्थित पुलिस समन्वय केंद्र ‘शौर्य भवन’ में आत्मसमर्पण और पुनर्वास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि इन शिविरों को धीरे-धीरे थानों, स्कूलों, अस्पतालों और लघु वनोपज के संग्रह तथा प्रसंस्करण केंद्रों में बदल दिया जाएगा।

इस अवसर पर शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव ने 17 अन्य माओवादियों के साथ मिलकर ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत आत्मसमर्पण कर दिया।

राज्य के गृह मंत्री शर्मा ने कहा, ”आज बस्तर और पूरा छत्तीसगढ़ ‘लाल आतंक’ के चंगुल से बाहर है। बस्तर अब विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।”

उन्होंने गलत सूचनाओं के प्रति आगाह किया और इस बात पर जोर दिया कि बस्तर के प्राकृतिक संसाधन ‘जल, जंगल, ज़मीन’ स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से युवाओं के हैं, और उन्हें इनकी रक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास लघु वनोपज के माध्यम से इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण है।

शर्मा ने बताया कि बस्तर के अंदरूनी इलाकों में स्थापित लगभग चार सौ सुरक्षा शिविरों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और उन्हें विकास केंद्रों में बदल दिया जाएगा।

31 मार्च, 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के राज्य के लक्ष्य को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अगस्त 2024 में घोषित समय-सीमा के अनुरूप एक सुविचारित रणनीति लागू की है, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के एक बड़े नेता, पापा राव के आत्मसमर्पण को अहम बताते हुए शर्मा ने कहा कि यह माओवादी नेतृत्व के ढांचे के कमजोर होने को दिखाता है और पुनर्वास की कोशिशों की सफलता को भी साबित करता है।

भाषा संजीव जोहेब

जोहेब


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