इस रात की सुबह कब? आरक्षण पर जारी वार-पलटवार, विरोध प्रदर्शनों से जनता का कितना भला?

इस रात की सुबह कब? आरक्षण पर जारी वार-पलटवार : When is the morning of this night? Continued attack on reservation

इस रात की सुबह कब? आरक्षण पर जारी वार-पलटवार, विरोध प्रदर्शनों से जनता का कितना भला?
Modified Date: January 5, 2023 / 12:11 am IST
Published Date: January 5, 2023 12:11 am IST

प्रदेश के युवा नियुक्तियों की आस लगाए बैठे हैं.. रिजर्व कैटेगरी के लोग आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं और सियासतदां आरोप-प्रत्यारोप का गेम खेल रहे हैं। एक महीने से ज्यादा वक्त से छत्तीसगढ़ की सियासत आरक्षण के मुद्दे पर बंधक बन कर रह गई है। सवाल ये कि जनता के मुद्दों पर सियासी दलों की नीयत और नीति क्या है?

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छत्तीसगढ़ में आरक्षण पर नूराकुश्ती से जनता के असल मुद्दे गौण होते जा रहे हैं.. भर्तियां रुकी हुई हैं, प्रमोशन अटके पड़े हैं। लोग सरकार के अगले कदम पर टकटकी लगाए हुए हैं। विपक्ष पर भी सभी की पैनी नजर है। सब समझ रहे हैं कि आरक्षण का पेंच फंसा हुआ है। एक महीने से ज्यादा हो गया, पूरी सियासत इसी एक मुद्दे पर आरोपों और सफाई के इर्द-गिर्द है। बीते साल सितंबर में बिलासपुर हाईकोर्ट ने कुल 58 फीसदी आरक्षण को रद्द करने का फैसला सुनाया। भानुप्रतापुर में उपचुनाव से ऐन पहले आनन-फानन में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण संशोधन विधेयक पास भी हो गया, लेकिन 2 दिसंबर से अब तक ये विधेयक राजभवन में राज्यपाल के पास है। पहले विधि परामर्श, फिर सरकार से 10 सवाल और फिर अधूरे जवाब के तर्कों के साथ विधेयक अब भी अटका है। इसी बीच पक्ष-विपक्ष के आरोपों मे संवैधानिक संस्थाएं तक निशाने पर आ गई हैं ।

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चुनावी साल में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती। सदन में सवाल का जवाब सवाल और सड़क पर प्रदर्शन का जवाब प्रदर्शन से दिया जा रहा है। मंगलवार को कांग्रेस ने जन अधिकार महारैली निकाली तो बुधवार को बीजेपी ने खराब मौसम के बावजूद धरना देकर सीएम हाउस घेरने की कोशिश की।

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आरक्षण की लड़ाई सदन और सड़क के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। तंज भरे बयानबाजी का सिलसिला जारी है। लेकिन अब भी जनता को जमीन पर कुछ नहीं मिला है। सवाल ये अपनी-अपनी सियासत चमकाने के बीच हल कहां है, एक दूसरे को चैलेंज तो सब दे रहे हैं, समाधान कौन देगा? आखिर इस रात की सुबह कब होगी?


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।