तानसेन संगीत समारोह : शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों से मंत्र मुग्ध हुए दर्शक, वाद्य यंत्रों के नए प्रयोग ने खींचा ध्यान

तानसेन संगीत समारोह : शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों से मंत्र मुग्ध हुए दर्शक, वाद्य यंत्रों के नए प्रयोग ने खींचा ध्यान

तानसेन संगीत समारोह : शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों से मंत्र मुग्ध हुए दर्शक, वाद्य यंत्रों के नए प्रयोग ने खींचा ध्यान
Modified Date: November 29, 2022 / 08:50 pm IST
Published Date: December 18, 2019 4:15 pm IST

ग्वालियर । तानसेन संगीत समारोह की दूसरे दिन की सायंकालीन सभा में भी सुरों के मुख़्तलिफ़ रंग देखने को मिले। इस सभा में इंदौर के अब्दुल सलाम नौशाद का क्लेरोनेट वादन ग्वालियर के अभिजीत सुखदाने का ध्रुपद गायन चैन्नई के के. शिवरमन का मृदंग वादन और यू एसए से आए मोहन देशपांडे का खयाल गायन हुआ।

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सभा का आगाज़ तानसेन संगीत महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ओर शिक्षकों के ध्रुपद गायन से हुआ। राग यमन में चौताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे – ,”जय शारदा भवानी” विद्यार्थियों ने इसे बड़े ही सलीके से गाया। पखावज पर जगत नारायण शर्मा ने साथ दिया।

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सभा की पहली प्रस्तुति के रूप में इंदौर के अब्दुल सलाम नौशाद का क्लेरोनेट वादन हुआ। पाश्चात्य संगीत में इस्तेमाल होने वाले इस वाद्य को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में इस्तेमाल करना बड़ी मेहनत और जोखिम का काम है, पर अब्दुल सलाम नौशाद इसे बड़ी सहजता से बजाते हैं। उन्होंने राग वागेश्री में वादन की शुरुआत की। इस राग में उन्होंने दो गतें पेश की। विलम्बित और द्रुत दोनों ही गतें एकताल में निबद्ध थीं। इन गतों को बजाने में आपने अपने कौशल का बखूबी परिचय दिया।आपका वादन गायकी अंग का तो है ही रागदारी की शुद्धता का भी आप बखूबी खयाल रखते हैं। विलम्बित बंदिश को बजाने में लयकारी विशिष्ट तिहाइयों ने रसिको को खूब लुभाया। विलम्बित से द्रुत लय का सफर रंजकता से वे कब पूरा कर लेते हैं ये हैरत में डालता है। आपने अपने वादन का समापन राग मिश्र पीलू में एक माधुर्य भरी धुन से किया। आपके साथ तबले पर चिंतेश भार्गव ने संगत की। जबकि तानपूरे पर अंशिका चौहान और रीतेश भार्गव ने साथ दिया।

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