2007 जामिया नगर दंगा मामला : दिल्ली की अदालत ने 12 लोगों को आरोप मुक्त किया
2007 जामिया नगर दंगा मामला : दिल्ली की अदालत ने 12 लोगों को आरोप मुक्त किया
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2007 के जामिया नगर दंगा मामले में शुक्रवार को 12 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया।
अदालत ने इसी के साथ अभियोजन पक्ष को ‘मनगढ़ंत जांच’ और पहचान के लिए ‘पुलिस गवाहों की पहले से तय संलिप्तता’ के लिए फटकार लगाई, जबकि कई गिरफ्तारियों को ‘अवास्तविक और पूर्वनिर्धारित’ करार दिया।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 95 पृष्ठों के एक आदेश में दिल्ली पुलिस की गंभीर चूक, विशेष रूप से पहचान परेड आयोजित करने में विफलता के लिए कड़ी आलोचना की और इसे ‘‘ न केवल विवेकाधिकार बल्कि अत्यावश्यक आवश्यकता’’ बताया। अदालत ने इसी के साथ 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 22 सितंबर, 2007 को लगभग 1,500 लोगों की एक हिंसक भीड़ ने जामिया नगर पुलिस चौकी के कर्मियों पर हमला किया था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक स्थानीय पुलिस ने एक बाजार को हटाने के लिए कदम उठाए थे, जो रमजान के महीने के दौरान नमाज अदा करने जाने वाले लोगों के लिए बाधा उत्पन्न कर रहा था।
सरकारी पक्ष ने दावा किया कि 12 स्थानीय नेताओं ने भीड़ को पुलिसकर्मी की हत्या करने और पुलिस थाना जलाने के लिए उकसाया, जिसके बाद चौकी में आग लगा दी गई, कई वाहनों को फूंक दिया गया, पुलिस की एक पिस्तौल, 10 कारतूस, कीमती सामान और एक वायरलेस सेट लूट लिया गया, और कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए, जिनमें से पांच गंभीर रूप से घायल हो गए।
न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष को फटकार लगाते हुए आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान जांच में, अदालत के लिए यह बात महत्वपूर्ण है कि पुलिस अधिकारियों ने न केवल कम से कम दो पुलिसकर्मियों की निशानदेही पर गिरफ्तार किए गए 11 व्यक्तियों की पहचान परेड (टीआईपी) आयोजित करने से परहेज किया, बल्कि जांच अधिकारी (आईओ) ने एक पुलिस गवाह द्वारा पहचान किए जाने पर गिरफ्तारी की संभावना पर भी विचार नहीं किया।’’
न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि टीआईपी कार्यवाही नहीं कराने से पुलिस गवाहों के माध्यम से इन आरोपियों की पहचान की वैधता पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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