पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में घटनाक्रम

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में घटनाक्रम

पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में घटनाक्रम
Modified Date: August 6, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: August 6, 2026 4:13 pm IST

पणजी, छह अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय द्वारा तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराए जाने के साथ ही करीब 13 वर्ष पुराने उस मामले में एक नया अध्याय जुड़ गया, जिसकी शुरुआत नवंबर 2013 में गोवा में उनकी एक कनिष्ठ महिला सहकर्मी द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने से हुई थी।

उच्च न्यायालय ने वर्ष 2021 में एक निचली अदालत द्वारा दिए गए बरी किए जाने के फैसले को बृहस्पतिवार को पलट दिया।

मामले में घटनाक्रम इस प्रकार है:

नवंबर 2013: एक कनिष्ठ महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया कि गोवा के बंबोलिम स्थित एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में तहलका के वार्षिक ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया।

पीड़िता ने घटना की शिकायत तत्कालीन तहलका प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को ईमेल के माध्यम से भेजी। उक्त ईमेल बाद में जांच का अहम आधार बना।

20 नवंबर, 2013: तेजपाल ने तहलका के प्रधान संपादक का पद छह महीने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने एक ईमेल में घटना को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ और ‘‘निर्णय में गंभीर चूक’’ बताया।

22 नवंबर, 2013: गोवा पुलिस ने मीडिया में आई खबरों और शिकायत की सामग्री का स्वतः संज्ञान लेते हुए तेजपाल के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की। तेजपाल के खिलाफ 2012 के निर्भया मामले के बाद संशोधित भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत बलात्कार, यौन उत्पीड़न समेत विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया गया।

30 नवंबर, 2013: उच्चतम न्यायालय से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद तेजपाल ने गोवा अपराध शाखा के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्हें गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

फरवरी 2014: गोवा पुलिस ने 2,800 से अधिक पृष्ठों का एक आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। इसमें गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और फोरेंसिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया।

एक जुलाई, 2014: उच्चतम न्यायालय ने सात महीने की हिरासत के बाद तेजपाल को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने और कुछ शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया।

सितंबर 2017: गोवा के मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र अदालत में आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। तेजपाल ने खुद को निर्दोष बताया।

2019-2021: अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता, पुलिस अधिकारियों, होटल कर्मचारियों और फोरेंसिक विशेषज्ञों सहित 71 गवाहों के बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष ने चार गवाहों के बयान दर्ज कराये और सीसीटीवी फुटेज, संदेशों तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर भरोसा किया।

21 मई, 2021: मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने यह कहते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा। 527 पृष्ठों के फैसले में अभियोजन के मामले में विसंगतियों और जांच में कमियों का उल्लेख किया गया।

इस फैसले की महिला अधिकार संगठनों और विधि विशेषज्ञों ने शिकायतकर्ता के आचरण संबंधी टिप्पणियों को लेकर व्यापक आलोचना की।

मई 2021: गोवा सरकार ने इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उसका कहना था कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का ‘‘गलत आकलन’’ किया, यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के व्यवहार को लेकर पूर्वाग्रहपूर्ण धारणाओं पर भरोसा किया और स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की।

उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए तेजपाल को नोटिस जारी किया।

2021-2026: उच्च न्यायालय ने कई सुनवाई के दौरान गोवा सरकार और तेजपाल के वकीलों की विस्तृत दलीलें सुनीं। राज्य सरकार ने कहा कि बरी करने का फैसला ‘‘विकृत निष्कर्षों’’ पर आधारित था, जबकि बचाव पक्ष ने दलील दी कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया।

30 जुलाई, 2026: न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

छह अगस्त, 2026: उच्च न्यायालय ने वर्ष 2021 के बरी किए जाने के फैसले को रद्द करते हुए 2013 की घटनाओं से जुड़े बलात्कार और अन्य आरोपों में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।

भाषा अमित नरेश

नरेश


लेखक के बारे में