परिवार से बेरोजगारी छुपाने व वसूली एजेंटों से बचने के लिए व्यक्ति ने अपने अपहरण का नाटक रचा

परिवार से बेरोजगारी छुपाने व वसूली एजेंटों से बचने के लिए व्यक्ति ने अपने अपहरण का नाटक रचा

परिवार से बेरोजगारी छुपाने व वसूली एजेंटों से बचने के लिए व्यक्ति ने अपने अपहरण का नाटक रचा
Modified Date: August 6, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: August 6, 2026 8:26 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) दिल्ली में 35 वर्षीय एक व्यक्ति ने परिवार से अपनी बेरोज़गारी की बात छुपाने और कर्ज वसूली एजेंट से परेशान होकर खुद के अपहरण का नाटक रचा लेकिन पुलिस ने उसे गाजियाबाद से ढूंढ निकाला। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

रोहिणी में इस व्यक्ति की कार लवारिस हालत में मिलने के बाद उसके परिवार ने पुलिस का रुख किया और उसके अपहरण का शक जताया।

पुलिस ने बताया कि रोहिणी का रहने वाला यह व्यक्ति तीन अगस्त को काम पर जाने की बात कहकर घर से निकला था।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि तीन अगस्त को रात करीब 8:05 बजे उसने अपने पिता को फोन करके कहा कि वह जल्द ही घर लौट आएगा। बाद में उसने परिवार को बताया कि रोहिणी सेक्टर-28 के पास उसकी गाड़ी एक बुज़ुर्ग दंपत्ति की गाड़ी से हल्की सी टकरा गई थी और वह उन्हें उनके गंतव्य तक छोड़ने जा रहा है।

अधिकारी ने कहा कि इसके कुछ मिनट बाद, उसने अपने छोटे भाई को फोन किया और सिर्फ ‘दीपू… दीपू.. रुको… कहकर फोन कट गया।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।

उसके परिवार ने उसे ढूंढने की कोशिश की और बाद में उसकी कार रोहिणी सेक्टर-28 के पास सड़क पर लावारिस हालत में मिली।

शिकायत के आधार पर, शाहबाद डेयरी पुलिस ने संदिग्ध अपहरण का मामला दर्ज किया और बाहरी उत्तरी ज़िले की पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान, पुलिस ने उसे गाज़ियाबाद में कौशांबी मेट्रो स्टेशन बस स्टैंड के पास ढूंढ निकाला और उसके परिवार से मिलाया।

अधिकारी ने कहा, ‘पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि वह लगभग एक साल से बेरोज़गार था, लेकिन परिवार को सच न बताने के लिए रोज़ काम पर जाने का नाटक करता था। उसने कई वित्त कंपनियों से कर्ज भी लिया था और किस्तें नहीं चुका पा रहा था, जिससे वसूली एजेंटों का दबाव बढ़ रहा था।’

अधिकारी ने बताया कि आर्थिक तंगी का सामना न कर पाने और परिवार से टकराव के डर से वह अपनी मर्ज़ी से घर से चला गया था और पकड़े जाने से बचने के लिए अलग-अलग जगहों पर रह रहा था।

भाषा नोमान नोमान नरेश

नरेश


लेखक के बारे में