खबरों के लिए एक लाख दृष्टिबाधितों का भरोसेमंद साथी बना एक अखबार

खबरों के लिए एक लाख दृष्टिबाधितों का भरोसेमंद साथी बना एक अखबार

खबरों के लिए एक लाख दृष्टिबाधितों का भरोसेमंद साथी बना एक अखबार
Modified Date: January 20, 2026 / 10:29 am IST
Published Date: January 20, 2026 10:29 am IST

(तस्वीर सहित)

(अविनाश बाकोलिया)

जयपुर, 20 जनवरी (भाषा) जिनकी आंखों में रोशनी नहीं, वह भी अखबार पढ़कर खबरों की दुनिया से रुबरू हो सकते हैं, यह बात बहुत सारे लोगों को भले ही कोरी कल्पना लगे, लेकिन पिछले 25 साल से जयपुर में एक समाचार पत्र ने इसे संभव बनाया है जिसका फायदा करीब एक लाख दृष्टिबाधित लोग उठा रहे हैं।

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‘ब्रेल समाचार पत्र’ नाम के इस पाक्षिक अखबार के पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह भरोसेमंद साथी बना हुआ है।

इस अखबार के प्रधान संपादक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह समाचार पत्र भारत के कई राज्यों में वितरित किया जा रहा है तथा 18 राज्यों के लगभग एक लाख दृष्टिबाधित इस समाचार पत्र का लाभ उठा रहे हैं।

श्रीवास्तव का कहना है कि जयपुर के अलावा असम, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित 18 राज्यों में डाक के माध्यम से अखबार भेजा जा रहा है।

उन्होंने विभिन्न राज्यों में अखबार की करीब 248 प्रतियां वितरित किये जाने की जानकारी दी, जिनमें जयपुर में वितरित 30 प्रतियां शामिल हैं।

श्रीवास्तव ने सरकारी सहायता नहीं मिलने पर दुख जताते हुए कहा, ‘‘सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से कुछ साल पहले तक कागज के लिए एक लाख रुपये की सहायता मिलती थी। यह रकम भी विभाग के कई चक्कर लगाने के बाद ही उपलब्ध हो पाती थी। लेकिन अब तो कागज का पैसा भी नहीं मिल रहा।’’

उन्होंने कहा कि अखबार के प्रकाशन का खर्च ‘राजस्थान दृष्टिबाधित कल्याण संघ’ उठा रहा है जिसे लोगों से दान मिलता है। उन्होंने कहा कि इस अखबार के प्रकाशन संस्थान में कुल चार कर्मचारी कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि इस अखबार में अपराध और राजनीति से जुड़ी खबर ना होकर केवल दृष्टिबाधित लोगों के काम की ही खबर प्रकाशित की जाती हैं, जैसे विवाह सम्मेलन, संगीत प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान, स्वास्थ्य, रोजगार संबंधी सूचना आदि।

अखबार के पूर्व प्रधान संपादक जितेन्द्र नाथ भार्गव ने दावा किया कि यह ब्रेल लिपि में प्रकाशित भारत का पहला अखबार है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में दो साल तक बैंक ऑफ राजस्थान से आर्थिक मदद मिली और इसके बाद सरकार की ओर से पानी से संबंधित एक विज्ञापन मिला था, लेकिन फिर आज तक एक भी विज्ञापन नहीं मिला है।

भार्गव ने कहा कि यह अखबार वर्ष 2000 में जयपुर के गणगौरी बाजार स्थित ‘राजस्थान दृष्टिबाधित कल्याण संघ’ के अध्यक्ष रहे दूलीचंद टांक की दूरदर्शिता का परिणाम है।

भार्गव के मुताबिक, दूलीचंद टांक की यह सोच थी कि जब सामान्य व्यक्ति शहर-प्रदेश की जानकारी अखबार के माध्यम से हासिल करता है, तो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यही सोच ‘ब्रेल समाचार पत्र’ को शुरू करने का कारण बनी।

उनके मुताबिक, इस समाचार पत्र का पहला अंक तत्कालीन प्रधान संपादक भंवरलाल बैद की देखरेख में तीन दिसंबर 2000 को प्रकाशित हुआ।

राजस्थान दृष्टिबाधित कल्याण संघ से मिली जानकारी के अनुसार, 500 रुपये में लोगों को अखबार की आजीवन सदस्यता प्रदान की जाती है। इसके तहत अखबार के सदस्यों को डाक के माध्यम से आजीवन अखबार पहुंचाया जाता है।

राजस्थान दृष्टिबाधित कल्याण संघ से मिली जानकारी के अनुसार, एक अखबार की लागत लगभग 50 रुपये आती है और पूरे भारत में लगभग 116 लोगों ने अखबार की सदस्यता ले रखी है।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त राकेश शर्मा ने कहा कि उन्हें दृष्टिबाधित लोगों के लिए प्रकाशित होने वाले इस अखबार की जानकारी नहीं हैं, लेकिन यदि ऐसा है तो निश्चित रूप से सरकार की ओर से मदद की जाएगी। शर्मा ने कहा कि वह खुद अखबार के दफ्तर में जाकर अखबार निकालने की पूरी प्रक्रिया को समझेंगे।

गुजरात के जूनागढ़ के गांव माखियाला निवासी 72 वर्षीय अकबरी पुरुषोत्तम रामजीभाई ने कहा, ‘‘मैं पिछले 15 साल से ब्रेल समाचार पत्र मंगवा रहा हूं। इस समाचार पत्र के माध्यम से दृष्टिबाधित लोगों की गतिविधियों से जुड़ा रहता हूं। वैसे तो रेडियो और टीवी के माध्यम से समाचार सुनने को मिल जाते हैं, लेकिन ब्रेल लिपि वाला समाचार पढ़ने का आनंद ही अलग है, क्योंकि हम ब्रेल लिपि की पाठ्य सामग्री पढ़ने के आदी हैं।’’

बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले और संस्कृत विषय के शिक्षक शिवशंकर उपाध्याय का कहना है कि ब्रेल समाचार पत्र से उन्हें लेख और कहानियां पढ़ने को मिल जाती हैं।

उपाध्याय ने कहा, ‘‘आजकल तकनीक इतनी विकसित हो गई है कि तुरंत हमें मोबाइल पर समाचार सुनने को मिल जाते हैं, उन समाचारों में कितनी सत्यता होती है पता नहीं, लेकिन ब्रेल समाचार पत्र से हमें सच्चाई का पता चलता है। हमारे लिए आदर्श स्थिति ब्रेल लिपि वाली पत्रिकाएं ही हैं।’’

जयपुर के जौहरी बाजार निवासी वीणा जैन ने बताया कि प्रदेश में कहां क्या हो रहा है, इसकी जानकारी उन्हें ‘ब्रेल समाचार पत्र’ से मिलती है। वीणा ने कहा कि इस अखबार से उन्हें इससे दृष्टिबाधित समाज के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी मिलती है।

भाषा बाकोलिया मनीषा हक

मनीषा


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