अन्नाद्रमुक सदस्यों के ‘क्रॉस वोटिंग’ करने से विजय सरकार के पक्ष में 144 मत पड़े
अन्नाद्रमुक सदस्यों के ‘क्रॉस वोटिंग’ करने से विजय सरकार के पक्ष में 144 मत पड़े
(तस्वीरों के साथ)
चेन्नई, 13 मई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)के 25 बागी सदस्यों द्वारा ‘क्रॉस-वोटिंग’ किये जाने के बाद सी जोसेफ विजय नीत सरकार के पक्ष में मतों की संख्या 144 तक पहुंच गई, जो विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े 118 से कहीं अधिक है। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने विश्वास प्रस्ताव के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि टीवीके सरकार ‘उधार’ के सहयोगियों के सहारे और अन्नाद्रमुक को विभाजित करके सत्ता में आई है।
मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव के दौरान पूर्व राज्य मंत्रियों एस पी वेलुमणि और सी वे षनमुगम सहित अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के समर्थन में मतदान किया। विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके के पास सदन में प्रभावी तरीके से 105 विधायक थे।
अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) के एकमात्र विधायक एस कामराज ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया। उन्हें पार्टी प्रमुख टी टी वी दिनाकरन ने टीवीके का समर्थन करने के लिए 12 मई को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी का समर्थन कर रहे 21 विधायकों और स्वयं पलानीस्वामी ने टीवीके सरकार के खिलाफ मतदान किया, जबकि पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के चार विधायकों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एकमात्र सदस्य मतदान में शामिल नहीं हुए।
द्रमुक के सभी 59 विधायकों और उसकी सहयोगी देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) की विधायक प्रेमलता विजयकांत ने सदन से बहिर्गमन किया।
मुख्यमंत्री विजय ने बाद में विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार पर्दे के पीछे राजनीतिक सौदेबाजी में संलिप्त होने के बजाय विकास प्रदान करने के लिए पूरी गति से काम करेगी।
विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने की वजह से जेसीडी प्रभाकर, अदालती मामले के कारण आर श्रीनिवास सेतुपति और मुख्यमंत्री द्वारा तिरुचिरापल्ली पूर्व निर्वाचन क्षेत्र खाली करने के कारण टीवीके की विधानसभा में मतदान के लिए प्रभावी संख्या 105 रह गई। हालांकि, ‘ क्रॉस-वोटिंग’ की वजह से नवगठित सरकार को 144 मत मिले जो बहुमत के लिए आवश्यक 118 संख्या से कहीं अधिक है।
मतदान से पहले, पलानीस्वामी ने विधानसभा द्वारा मुख्यमंत्री की ओर से पेश ‘विश्वास प्रस्ताव’ पर चर्चा के लिए अन्नाद्रमुक के बागी विधायक एस पी वेलुमणि को आमंत्रित करने पर आपत्ति जताई और कहा कि उनकी पार्टी ने अकेले दम पर 47 सीटें जीती हैं।
पलानीस्वामी ने कहा, ‘‘लोगों ने दो पत्ती के चिह्न पर हमें वोट दिया। मेरे द्वारा पार्टी महासचिव के रूप में यह घोषणा करने के बाद कि हम इस प्रस्ताव पर सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे, उन्हें बोलने के लिए आमंत्रित करना उचित नहीं है।’’
विधानसभाध्यक्ष ने इस पर कहा कि सदस्यों को बोलने के लिए बुलाना उनका विशेषाधिकार है और उन्होंने वेलुमणि को अपना संबोधन जारी रखने के लिए कहा।
हालांकि, पलानीस्वामी का समर्थन करने वाले अन्नाद्रमुक सदस्य विरोध करने के लिए खड़े हो गए, जबकि वेलुमणि ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि अन्नाद्रमुक टीवीके का समर्थन करेगी।
पलानीस्वामी ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए सवाल किया कि पार्टी में मतभेद होने के बावजूद मुख्यमंत्री पार्टी नेता की जानकारी के बिना अन्नाद्रमुक के एक विधायक के घर जाने का फैसला कैसे कर सकते हैं।
अन्नाद्रमुक ने कहा, ‘‘टीवीके ने स्वच्छ प्रशासन का वादा किया है। विधानसभा चुनाव में केवल 34 प्रतिशत लोगों ने टीवीके को वोट दिया जबकि बाकी लोगों ने अन्य पार्टियों को वोट दिया।’’
अन्नाद्रमुक नेता ने दावा किया कि खबरों से संकेत मिलता है कि उनकी पार्टी के कुछ विधायकों को मंत्री पद और सरकारी पदों का प्रलोभन दिया गया है।
कांग्रेस के पांच सदस्यों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा),मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), विदुथलाई चिरुथइगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के दो-दो सदस्यों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया, जबकि द्रमुक के 59 विधायकों और डीएमडीके के एक सदस्य ने मतदान के समय बहिर्गमन किया।
उदयनिधि स्टालिन ने टीवीके सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि सभी लोगों ने टीवीके को वोट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुल 4.93 करोड़ मतों में से टीवीके को केवल 1.72 करोड़ वोट मिले, जबकि शेष 65 प्रतिशत वोट टीवीके के खिलाफ पड़े।
वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन को रोकने के लिए टीवीके को बिना शर्त समर्थन दिया है।
उदयनिधि ने 12 मई को सी वे षनमुगम के घर विजय के जाने का जिक्र कर कटाक्ष किया, ‘‘ आपने विधायक को उनकी पार्टी नेतृत्व को सूचित किए बिना अपने पक्ष में वोट दिलवाकर अन्नाद्रमुक को विभाजित कर दिया। विडंबना यह है कि पहले एक घर में सोफा जाता है, फिर मुख्यमंत्री उस घर में जाते हैं… लोग सोच रहे हैं कि क्या इस राजनीतिक बदलाव के पीछे कोई लेन-देन हुआ था।’’
उन्होंने टिप्पणी की कि टीवीके सरकार द्रमुक के ‘‘उधार’’ के सहयोगियों और ‘‘अन्य’ (अन्नाद्रमुक के संदर्भ में हालांकि, नाम नहीं लिया) लोगों की मदद से चल रही है।
भाषा धीरज मनीषा
मनीषा

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