आधव अर्जुन ने ‘तमिलनाडु से प्रधानमंत्री’ की पैरवी की, कहा- सत्ता केवल उत्तरी राज्यों के लिए नहीं
आधव अर्जुन ने ‘तमिलनाडु से प्रधानमंत्री’ की पैरवी की, कहा- सत्ता केवल उत्तरी राज्यों के लिए नहीं
चेन्नई, 12 अगस्त (भाषा) तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) नेता एवं तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने राज्य से प्रधानमंत्री बनाए जाने की वकालत करते हुए बुधवार को कहा कि राजनीतिक सत्ता केवल उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों की जागीर नहीं है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा राज्य विधानसभा में पेश परिसीमन-विरोधी प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मंत्री ने सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने सुधारवादी नेता पेरियार ई. वी. रामासामी और दिग्गज नेता सी. एन. अन्नादुरई के दौर से शुरू हुई इस यात्रा का जिक्र किया।
अर्जुन ने मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव को ‘‘ऐतिहासिक’’ बताते हुए कहा कि इसका आधार इस सिद्धांत पर टिका है कि राज्यों के बिना कोई केंद्र सरकार नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि द्रविड़ आंदोलन के दिग्गज अन्ना ने संसद में कहा था कि राज्यों की स्वायत्तता के बिना भारत का निर्माण नहीं हो सकता और राज्यों की प्रगति को नजरअंदाज कर देश की प्रगति संभव नहीं है।
इसी संदर्भ में अर्जुन ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के सामने जिस तरह उनके देश में उत्तर-दक्षिण गृहयुद्ध (1861-65) की स्थिति बनी थी, उसी तरह भारत और तमिलनाडु भी उत्तर-दक्षिण संघर्ष का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब अब्राहम लिंकन राष्ट्रपति थे, तब उन्हें एक युद्ध का सामना करना पड़ा था और वह उत्तर-दक्षिण युद्ध था। उसी तरह आज भारत और हम उत्तर-दक्षिण संघर्ष का सामना कर रहे हैं। क्रांतिकारी डॉ. बी. आर. आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान समानता पर जोर देता है और अनुच्छेद 14 में कहा गया है कि सभी समान हैं।’’
अर्जुन ने कहा कि सभी के हित में राजनीतिक सत्ता का निर्माण किया जाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था में राज्यों की स्वायत्तता बेहद महत्वपूर्ण पहलू है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय आधारित आरक्षण की व्यवस्था वाले तमिलनाडु ने पहले संविधान संशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब पेरियार ई. वी. आर. और अन्ना एक साथ आए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘यह तमिलनाडु का इतिहास है और हमारे मुख्यमंत्री उसी रास्ते पर चल रहे हैं… यह प्रस्ताव संविधान की रक्षा के लिए है।’’
उन्होंने कहा कि टीवीके अन्ना के सिद्धांतों का अनुसरण कर रही है। उन्होंने कहा कि दिवंगत दिग्गज नेता के ये सिद्धांत केवल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के लिए नहीं, बल्कि तमिलनाडु और भारत के हित में थे।
उन्होंने राज्यों की स्वायत्तता की रक्षा के लिए काम करने वाले दिवंगत नेताओं, जिनमें अन्नाद्रमुक के एम. जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता तथा द्रमुक के दिग्गज एम. करुणानिधि शामिल हैं, की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि परिसीमन पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू राज्यों की स्वायत्तता के कथित क्षरण और उसके खतरे को लेकर था। अर्जुन ने आरोप लगाया, ‘‘उन दिनों अन्ना ने कहा था कि उत्तर आगे बढ़ रहा है और दक्षिण पिछड़ रहा है; आज भी यह समस्या बनी हुई है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि नीट, जीएसटी और सीएए जैसे ‘‘तमिलनाडु-विरोधी कानूनों’’ के खिलाफ तमिलनाडु के 40 सांसद- 39 तमिलनाडु से और एक पुडुचेरी से आवाज उठाते हैं, लेकिन पिछले करीब 10 वर्षों से ऐसे कानून राज्य के खिलाफ बने हुए हैं।
परिसीमन प्रस्ताव पर डीएमडीके विधायक प्रेमलता की टिप्पणी का हवाला देते हुए, जिसमें सीटों में वृद्धि और उससे होने वाले संभावित लाभों की चर्चा की गई थी, अर्जुन ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आज भी ऐसी स्थिति है कि पांच या छह उत्तरी राज्यों के एक साथ आने पर प्रधानमंत्री चुना जा सकता है। इस स्थिति को बदलना चाहिए। भविष्य में प्रधानमंत्री दक्षिणी राज्यों, तमिलनाडु से चुना जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि सत्ता केवल उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात के लिए नहीं है।
अर्जुन ने कहा, ‘‘तमिलनाडु विधानसभा में जिस तरह हमारी आवाज गूंजी है, उसी तरह संसद में प्रधानमंत्री के रूप में भी हमारी आवाज गूंजनी चाहिए। परिसीमन पर यह प्रस्ताव इसी उद्देश्य के लिए है। अर्थव्यवस्था के मामले में हम महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन संसद में बनाए जाने वाले सभी कानून तमिलनाडु के खिलाफ क्यों हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि सत्ता का ढांचा जनसंख्या की ताकत के आधार पर काम कर रहा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यही सबसे बड़ी समस्या है और ऐसी स्थिति संविधान पर ही सवाल खड़ा करती है।
अर्जुन ने दिवंगत प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में परिसीमन को लेकर लगाए गए 25 साल के रोक का भी जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में जनसंख्या में बदलाव के साथ संसद की संरचना नहीं बदलती।
तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार को मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश प्रस्ताव को पारित कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार से लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने का आग्रह किया गया है।
प्रस्ताव में 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की भी मांग की गई। करीब दो घंटे चली गहन चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित किया गया।
भाषा अमित गोला
गोला

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