मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धरमैया ने कहा: साफ अंतरात्मा से मैंने पद छोड़ा
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धरमैया ने कहा: साफ अंतरात्मा से मैंने पद छोड़ा
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 28 मई (भाषा) कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के साथ सत्ता संघर्ष और महीनों से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को इस पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देने की पेशकश की है, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया है क्योंकि वह कर्नाटक में सक्रिय राजनीति को प्राथमिकता देते हैं ताकि ‘अपनी आखिरी सांस तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ सकें।’’
खचाखच भरी प्रेसवार्ता में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए, सिद्धरमैया (77) ने कहा कि वह साफ अंतरात्मा के साथ पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने दो कार्यकाल तक लोगों की सेवा करने का अवसर प्रदान करने के लिए अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद दिया।
उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत की अनुपस्थिति में उनके विशेष सचिव प्रभु शंकर को इस्तीफा सौंपा।
सिद्धरमैया ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। मुझे विश्वास है कि राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बार-बार कहा था कि जब भी पार्टी आलाकमान मुझे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। आलाकमान ने मुझे दो दिन पहले पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे दो बार कर्नाटक के लोगों की सेवा करने का मौका मिला जिसके लिए मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे को धन्यवाद देता हूं।’’
जब सिद्धरमैया से पूछा गया कि क्या आलाकमान ने उन पर (इस्तीफा देने का) दबाव डाला था, तो उन्होंने कहा, ‘‘कैसा दबाव? उन्होंने मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा था, जिसके तुरंत बाद मैंने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह साफ अंतरात्मा के साथ पद छोड़ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मूल्यों और विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया और न ही कभी सत्ता या धन के पीछे भागे।
सिद्धरमैया ने कहा कि उन्होंने कभी धन संचय के बारे में नहीं सोचा और उनका 50 वर्षों का राजनीतिक करियर सबके सामने एक खुली किताब की तरह है।
सिद्धरमैया ने सरकार की पांच गारंटियों के बारे में कथित रूप से ‘दुष्प्रचार’ करने को लेकर भाजपा, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा। भाजपा एवं मोदी ने कथित रूप से कहा था कि इनके कार्यान्वयन से कर्नाटक दिवालिया हो जाएगा।
प्रेसवार्ता में सिद्धरमैया के साथ उपमुख्यमंत्री एवं उनके संभावित उत्तराधिकारी डी के शिवकुमार एवं अन्य मंत्रिमंडलीय सहयोगी मौजूद थे। सिद्धरमैया ने स्पष्ट किया कि वह सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे।
सिद्धरमैया ने कहा, “आलाकमान ने मुझे राज्यसभा जाने के लिए कहा था। मैंने विनम्रतापूर्वक इसे अस्वीकार कर दिया। मुझे राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं राज्य की राजनीति में ही रहूंगा। जनता ने मुझे पांच साल के लिए चुना है और अभी दो साल बाकी हैं। तब तक मैं कर्नाटक की जनता और अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के लिए काम करूंगा।”
अपने राजनीतिक संघर्ष के सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी विधायक, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री और मुख्यमंत्री बनने का सपना नहीं देखा था। उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति में मेरा प्रवेश आकस्मिक था क्योंकि न तो मेरे माता-पिता और न ही मेरे परिवार का कोई सदस्य राजनीति में था।’’
सिद्धरमैया ने कहा कि (राजनीति में) जनसमर्थन पाने वाले ही टिक सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपने मूल्यों और विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भूमि, जल और भाषा जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने कभी समझौता नहीं किया तथा न ही कभी करेंगे, क्योंकि ये जनता के अधिकार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए संविधान ही हमारा धर्म है। अपनी अंतिम सांस तक मैं सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ता रहूंगा क्योंकि संविधान ऐसी ताकतों के खिलाफ खड़ा है।”
सिद्धरमैया ने कहा कि संविधान न होता तो न तो वह शिक्षित हो पाते और न ही मंत्री या मुख्यमंत्री बन पाते।
उन्होंने कहा, ‘‘संविधान के बिना, मैं भेड़ें चरा रहा होता या खेत जोत रहा होता क्योंकि मेरे माता-पिता अशिक्षित थे।’’
बुद्ध, 12वीं शताब्दी ईस्वी के समाज सुधारक बसवेश्वर, महात्मा गांधी और डॉ. बी आर आंबेडकर में आस्था रखते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि समाज को समतावादी बनना चाहिए।
सिद्धरमैया ने कहा कि उनकी सरकार ने 550 वादे किए थे, जिनमें से 300 अब तक पूरे हो चुके हैं, उनमें चुनाव पूर्व पांच वादे भी शामिल हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि इन वादों को लागू नहीं किया जा सकता। उसने दावा किया कि इससे राज्य दिवालिया हो जाएगा और खजाना खाली हो जाएगा।
सिद्धरमैया ने दावा किया, “प्रति व्यक्ति आय में हम पूरे देश में पहले स्थान पर हैं। जीएसटी संग्रह में हम महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर हैं।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा राज्य को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने के कारण राज्य फिलहाल राजस्व घाटे का सामना कर रहा है।
भाषा राजकुमार संतोष
संतोष

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