अन्नाद्रमुक और टीवीके का वैचारिक एजेंडा समान, इसीलिए उसका समर्थन किया: बागी नेता षणमुगम
अन्नाद्रमुक और टीवीके का वैचारिक एजेंडा समान, इसीलिए उसका समर्थन किया: बागी नेता षणमुगम
चेन्नई, 13 मई (भाषा) अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी नेता सी वी षणमुगम ने बुधवार को यहां दावा किया कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) और अन्नाद्रमुक का वैचारिक एजेंडा समान है, दोनों द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को एक ‘बुरी ताकत’ के रूप में देखते हैं और इसी कारण विपक्षी दल के विधायकों के एक वर्ग ने सदन में बहुमत परीक्षण में सरकार का समर्थन किया।
तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत परीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, षणमुगम ने अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी के इस दावे को खारिज कर दिया कि सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार का समर्थन करने के बदले उन्हें ‘मंत्री पद’ मिलेंगे।
षणमुगम और एक अन्य वरिष्ठ नेता एस पी वेलुमणि के समर्थन में एकजुट हुए 25 अन्नाद्रमुक विधायकों के क्रॉस-वोटिंग से टीवीके सरकार को 234 सदस्यीय सदन में बहुमत में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसे 144 विधायकों का समर्थन मिल गया।
द्रमुक ने सदन से बहिर्गमन किया, जबकि पीएमके ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और एकमात्र भाजपा विधायक तटस्थ रहे। पलानीस्वामी के प्रति निष्ठा रखने वाले 21 अन्य अन्नाद्रमुक विधायकों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया।
षणमुगम ने कहा, ‘‘उनका (पलानीस्वामी का) दावा पूरी तरह झूठा है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हमने सरकार का समर्थन इसलिए किया क्योंकि अन्नाद्रमुक और टीवीके दोनों की विचारधारा एक ही है; द्रमुक का विरोध करना। अन्नाद्रमुक पार्टी की स्थापना स्वर्गीय एम जी रामचंद्रन ने द्रमुक को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए ही की थी।’
पलानीस्वामी के इस बयान पर कि अन्नाद्रमुक ने पहले ही विधायक दल के नेता, उपनेता और सचेतक का चयन कर लिया है, उन्होंने कहा, ‘इनका चुनाव करने से पहले, पार्टी को एक बैठक बुलानी चाहिए थी और सभी 47 विधायकों की मंजूरी लेनी चाहिए थी।’
उन्होंने सवाल किया, “क्या वे (पलानीस्वामी) बैठक के प्रस्ताव की प्रति दिखा सकते हैं? क्या वे बता सकते हैं कि विधायक दल की बैठक कब और किस समय हुई थी?”
षणमुगम ने दावा किया कि पलानीस्वामी पिछले सप्ताह पुडुचेरी के उस रिसॉर्ट में आए थे जहां अन्नाद्रमुक विधायक ठहरे हुए थे, जब टीवीके सरकार बनाने के प्रयास कर रही थी और उन्होंने सभी विधायकों के हस्ताक्षर अलग-अलग लिए थे।
षणमुगम ने दावा किया, ‘‘उन्होंने कहा कि उन्होंने उच्च प्राधिकारियों से बात कर ली है और द्रमुक हमारी पार्टी को बाहर से समर्थन देगी और वह मुख्यमंत्री बनेंगे। हमारी पार्टी को कई मंत्री पद मिलेंगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया, “द्रमुक के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने फोन पर उनसे संपर्क किया और समर्थन देने के लिए उन्हें बधाई दी और मंत्री पद का आश्वासन दिया। मैं पूरी तरह से हैरान था और इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। यहां तक कि मेरा परिवार भी इसे स्वीकार नहीं करेगा।”
लगातार चार चुनाव हारने का जिक्र करते हुए, षणमुगम ने दावा किया कि पलानीस्वामी ने पार्टी प्रमुख के रूप में कभी भी किसी भी चुनावी हार की जिम्मेदारी नहीं ली।
इसी तरह का विचार व्यक्त करते हुए, विधायक एस पी वेलुमणि ने कहा, “हमारा मकसद द्रमुक को हराना है। हमारी पार्टी और टीवीके के सिद्धांत एक जैसे हैं। इसलिए हमने इसका समर्थन किया है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्नाद्रमुक के विधायक अभी भी एकजुट हैं।
उन्होंने कहा, “पार्टी में कोई फूट नहीं है। अन्नाद्रमुक की भविष्य की सफलता तय करने के लिए हमें तुरंत पार्टी की आम परिषद की बैठक बुलानी होगी।”
भाषा अमित नरेश
नरेश

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