द्रविड़ दलों के बीच ‘सियासी साजिश’ के कारण अन्नाद्रमुक नेता टीवीके में शामिल हुए: मंत्री अर्जुन
द्रविड़ दलों के बीच ‘सियासी साजिश’ के कारण अन्नाद्रमुक नेता टीवीके में शामिल हुए: मंत्री अर्जुन
चेन्नई, 28 मई (भाषा) तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि दो द्रविड़ पार्टियों के बीच ‘सियासी साजिश’ के चलते कई अन्नाद्रमुक नेता और कार्यकर्ता तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हुए हैं।
यहां एक पार्टी सभा को संबोधित करते हुए अर्जुन ने दावा किया कि अन्नाद्रमुक के लगभग 90 प्रतिशत कार्यकर्ता अब मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल होना चाहते हैं, ताकि तमिलनाडु को ‘राजशाही और भ्रष्ट राजनीति’ से बचाया जा सके।
अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायकों, जिला सचिवों और मजदूर संगठनों के नेताओं का टीवीके में स्वागत करते हुए अर्जुन ने स्पष्ट किया कि किसी को भी कोई आर्थिक प्रलोभन या पद की पेशकश नहीं की गई थी। इनमें वरिष्ठ नेता वेल्लमंडी एन नटराजन भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक नेतृत्व द्वारा लिये गए निर्णय उसके कार्यकर्ताओं के कल्याण के पूरी तरह खिलाफ थे, जिसके परिणामस्वरूप लगातार 14 चुनावी हार हुईं। कार्यकर्ता यह देखकर बहुत दुखी थे कि पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम द्रमुक के एक साधारण विधायक बनकर रह गए। यह वही पार्टी है जिसके खिलाफ जयललिता ने जमकर लड़ाई लड़ी थी।’’
टीवीके नेता ने कहा, ‘‘उन्होंने (द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने) एक बड़ी साजिश रची। इसी वजह से अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित हो गया और जयललिता के न रहने पर वे आज टीवीके में शामिल हो रहे हैं।’’
अर्जुन ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन और अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के बीच सत्ता और भ्रष्टाचार से होने वाली आय को साझा करने के उद्देश्य से एक प्रशासनिक समझौता करने के लिए गुप्त बातचीत हुई।
अर्जुन ने कहा, ‘‘पुडुचेरी में हाल ही में हुई अन्नाद्रमुक विधायकों की बैठक के दौरान पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के बहाने 47 विधायकों के हस्ताक्षर एकत्र किए गए। सीवी.ई. षणमुगम और सी. विजयभास्कर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाया कि जब जनता ने पार्टी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है, तो सिर्फ 47 विधायकों वाली पार्टी मुख्यमंत्री बनने का सपना कैसे देख सकती है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वास्तविक योजना’ द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन को मुख्यमंत्री और पलानीस्वामी को उपमुख्यमंत्री बनाने की थी, ताकि ‘दोनों परिवारों के बीच ‘मासिक निधि’ का संग्रह और वितरण सुनिश्चित हो सके’।
टीवीके के मंत्री के अनुसार, अन्नाद्रमुक नेतृत्व द्वारा जनता के जनादेश के प्रति इस ‘विश्वासघात’ ने प्रमुख धर्मनिरपेक्ष सहयोगियों- कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, वीसीके और आईयूएमएल- को अपनी निष्ठा बदलने और टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व में गठबंधन करने के लिए मजबूर किया।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

Facebook


