शासन की तीनों शाखाएं जांच के लिए खुली हों: एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी
शासन की तीनों शाखाएं जांच के लिए खुली हों: एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) शिवसेना (उबाठा) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को कहा कि शासन की तीनों शाखाएं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—कानून के समक्ष समान, जवाबदेह और जांच के लिए खुली होनी चाहिए।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की एक पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय पर एक अध्याय को लेकर उठे विवाद का मुद्दा उठाया। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने निर्देश जारी किए थे और इस मुद्दे पर एनसीईआरटी ने माफीनामा जारी किया था।
चतुर्वेदी ने कहा, “11 मार्च को उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस अध्याय को लिखने वाले शिक्षाविदों की शैक्षणिक मामलों, वित्त पोषित संस्थानों और सरकारी संस्थानों में कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित अदालत के निर्देश भी “न्यायिक अतिक्रमण” की श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि शासन की तीनों शाखाएं कानून के समक्ष समान हों, जवाबदेह हों और उनकी जांच हो सके। यदि इनमें किसी प्रकार की असमानता या सर्वोच्चता की स्थिति बनती है तो यह देश के लिए समस्या पैदा कर सकती है।”
राज्यसभा सदस्य ने कानून मंत्री से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी “न्यायिक तानाशाही या न्यायिक अतिक्रमण” की स्थिति न बने।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर निशाना बनाए जाने पर उसकी नाराजगी समझी जा सकती है, लेकिन कानून के सामने सभी को समान रूप से जवाबदेह होना चाहिए।
चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के घर से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस संसद में लंबित है, लेकिन उन्हें केवल स्थानांतरित किया गया और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनेता या अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है तो जांच और कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश

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