झारखंड में महिला दिवस पर एक यात्री ट्रेन का संचालन पूरी तरह से महिला दल ने किया

झारखंड में महिला दिवस पर एक यात्री ट्रेन का संचालन पूरी तरह से महिला दल ने किया

झारखंड में महिला दिवस पर एक यात्री ट्रेन का संचालन पूरी तरह से महिला दल ने किया
Modified Date: March 8, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: March 8, 2026 4:14 pm IST

रांची, आठ मार्च (भाषा) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को रांची-इरगांव मार्ग पर एक यात्री ट्रेन का संचालन पूरी तरह से महिला दल द्वारा किया गया। एक महिला अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि इस दल में शामिल ट्रेन चालक, सहचालक, ट्रेन प्रबंधक और टिकट परीक्षक से लेकर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की कर्मी तक सभी महिलाएं थीं।

दक्षिण पूर्व रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सूची सिंह ने कहा, ‘‘आज का दिन महिलाओं और रांची रेल मंडल के लिए बहुत खास है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को ध्यान में रखते हुए हमने एक यात्री ट्रेन का संचालन पूरी तरह से महिला दल द्वारा करने की विशेष पहल की है। ट्रेन चालक से लेकर टिकट परीक्षक और आरपीएफ कर्मियों तक, सभी महिलाएं थीं।’’

उन्होंने कहा कि ट्रेन इरगांव स्टेशन तक गई।

उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती जागरूकता और कई बदलावों के साथ, महिलाएं अब रेलवे जैसे उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही हैं जहां पहले पुरुषों का वर्चस्व था। वे इन क्षेत्रों में सफलता भी हासिल कर रही हैं।

यह ट्रेन सुबह 9.13 बजे रांची स्टेशन से रवाना हुई और करीब डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद सुबह 10.40 बजे इरगांव पहुंची। नौ ठहरावों के साथ इसने 58 किमी की दूरी तय की। इस ट्रेन में सैकड़ों यात्री सवार थे।

रांची की मुख्य टिकट निरीक्षक मसीरा सुरीन ने कहा कि उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि वे ट्रेन का प्रबंधन कर महिला दिवस मना रही है।

उन्होंने कहा, ‘सरकार अब महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।’

आरपीएफ की उप-निरीक्षक रीता कुमारी ने कहा कि दिन बदल गए हैं और अब महिलाएं ट्रेन में सुरक्षित रूप से अकेले यात्रा कर सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘उनकी सुरक्षा के लिए आरपीएफ ने महिला कर्मियों को नियुक्त किया है और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना हमारा कर्तव्य है।’

लोको पायलट दीपाली अमृत ने कहा कि रेलवे में महिलाओं की भूमिका और महत्व कई गुना बढ़ गया है।

अमृत ने कहा, ‘‘जब मैं 2007 में रेलवे में शामिल हुई थी तब मैं अकेली थी। धीरे-धीरे रेलवे में महिलाओं की रुचि बढ़ी। अब हटिया मंडल में तीन ट्रेन चालक और लगभग 10 सहायक ट्रेन चालक महिलाएं हैं।’’

भाषा

प्रचेता संतोष

संतोष


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