अंबुमणि ने मोदी से 2009 के बाद जन्मे लोगों के लिए सिगरेट बिक्री पर प्रतिबंध का आग्रह किया

अंबुमणि ने मोदी से 2009 के बाद जन्मे लोगों के लिए सिगरेट बिक्री पर प्रतिबंध का आग्रह किया

अंबुमणि ने मोदी से 2009 के बाद जन्मे लोगों के लिए सिगरेट बिक्री पर प्रतिबंध का आग्रह किया
Modified Date: May 2, 2026 / 03:24 pm IST
Published Date: May 2, 2026 3:24 pm IST

चेन्नई, दो मई (भाषा) पट्टाली मक्कल काची (पीएमके)-नीत अंबुमणि रामदास ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि एक जनवरी 2009 या उसके बाद जन्मे व्यक्तियों के धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें सिगरेट बेचे जाने पर रोक लगाने के लिए विधायी कदम उठाएं, ताकि एक ‘धूम्रपान-मुक्त पीढ़ी’ बनाई जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पूर्व मंत्री अंबुमणि ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ‘‘एक बार सिगरेट पर प्रतिबंध लागू होने के बाद, यह आने वाली पीढ़ियों को कानूनी रूप से तंबाकू उत्पादों तक पहुंच से वंचित करेगा।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं अत्यंत तात्कालिकता और जिम्मेदारी की भावना के साथ उस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं, जो लाखों भारतीयों के जीवन को लगातार खतरे में डाल रहा है, विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच, जो धूम्रपान से प्रभावित हो रही है।’’

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पहली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार (2004-09) में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने देश भर में सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने पर प्रतिबंध लगाया था।

अंबुमणि ने बताया कि वैश्विक स्वास्थ्य अनुमानों के अनुसार, लगभग 26 करोड़ 70 लाख भारतीय, यानी लगभग हर पांच में से एक नागरिक, तंबाकू का सेवन करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हर साल तंबाकू के सेवन से सीधे तौर पर 13.5 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जबकि परोक्ष धूम्रपान के संपर्क में आने से सालाना लगभग 23 लाख मौतें होती हैं।’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ये आंकड़े चिंताजनक हैं और एक व्यापक जन स्वास्थ्य संकट को दर्शाते हैं।’’

अंबुमणि ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ‘‘कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 40 से 50 प्रतिशत के लिए तंबाकू जिम्मेदार है। तंबाकू-जनित कैंसर के कारण देश में हर साल 4.7 लाख से अधिक मौतें होती हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस संदर्भ में, मैं केंद्र सरकार से पुरजोर आग्रह करता हूं कि वह ब्रिटेन की तरह एक परिवर्तनकारी कानून लागू करने पर विचार करे, जो एक विशिष्ट वर्ष (जैसे 2009) या उसके बाद जन्मे व्यक्तियों के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री और उपभोग को स्थायी रूप से प्रतिबंधित करे।’’

उन्होंने कहा कि इस तरह का पीढ़ीगत प्रतिबंध भारत में समय के साथ तंबाकू के उपयोग को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

भाषा प्रचेता सुरेश

सुरेश


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