खान सर के खिलाफ अंजना ओम कश्यप के मुकदमे को अदालत ने मध्यस्थता के लिए भेजा

खान सर के खिलाफ अंजना ओम कश्यप के मुकदमे को अदालत ने मध्यस्थता के लिए भेजा

खान सर के खिलाफ अंजना ओम कश्यप के मुकदमे को अदालत ने मध्यस्थता के लिए भेजा
Modified Date: July 2, 2026 / 02:05 pm IST
Published Date: July 2, 2026 2:05 pm IST

नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘खान सर’ के नाम से मशहूर शिक्षक फैसल खान और अन्य शिक्षकों के खिलाफ टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड और उसकी प्रबंध संपादक अंजना ओम कश्यप के मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया।

यह मामला सोशल मीडिया पर कथित मानहानि वाली पोस्ट से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने चैनल और कश्यप से संयम बरतने को कहा, साथ ही खान सर से पत्रकार अंजना ओम कश्यप के बच्चों के बारे में की गई पोस्ट को हटाने को कहा।

अदालत ने आपसी सहमति से मामला सुलझाने की बात कहते हुए प्रतिवादियों से अपनी पोस्ट में इस्तेमाल की गई ‘असंसदीय’ बातों को हटाने पर विचार करने को कहा।

खान सर के अलावा, इस मुकदमे में ‘अभिनय मैथ्स’ के संस्थापक अभिनय शर्मा, आईसीएस कोचिंग की सह-संस्थापक बबिता त्यागी और नैया पार एजुकेशन के अरविंद भदौरिया को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

वादी पक्ष के वकील ने कहा कि खान सर ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी उजागर की है कि कश्यप के बच्चे कहां पढ़ रहे हैं और उन्हें ‘‘धमकियां मिल रही हैं’’।

अदालत ने वकीलों से कहा, ‘‘वे (वादी) संयम बरतेंगे। आप (खान सर) बच्चे के बारे में दी गई जानकारी हटा लें। उनसे बात करने की कोशिश करें और देखें कि जिन हिस्सों में कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, क्या उन्हें हटाया जा सकता है।’’

अदालत ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘दोनों पक्षों को संयम बरतना होगा। आप (वादी के वकील) सुनिश्चित करें कि आपकी मुवक्किल संयम बरतें। और आप (खान सर) बच्चों के बारे में जानकारी देना बंद करें। यह ऐसा मुद्दा नहीं है जो अदालत तक आना चाहिए। जब ​​आप युवाओं को पढ़ा रहे हो, तो यह आपके स्वभाव का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, सही बात है ना?’’

वादियों और खान सर के वकीलों ने भरोसा दिलाया कि वे संयम बरतेंगे और बच्चों से जुड़ी किसी भी बात को हटा देंगे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘थोड़ी जांच-पड़ताल के बाद ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष इन विवादों को आपसी सहमति से सुलझा सकते हैं। अगर किसी वरिष्ठ मध्यस्थ को नियुक्त किया जाता है, तो दोनों पक्ष समझौते की शर्तों पर विचार करने को तैयार हैं। वे आज ही मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू करने को भी तैयार हैं।’’

सुनवाई के दौरान, वादी के वकील ने कहा कि प्रतिवादी अपने पाठ्यक्रम में राजनीति पर चर्चा कर रहे थे, जो एक शिक्षक के तौर पर उन्हें नहीं करना चाहिए।

अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘हर कोई राजनीति पर चर्चा कर रहा है। जिसे राजनीति के बारे में कुछ नहीं पता, वह भी राजनीति पर चर्चा करता है। राजनीति का मतलब यही तो है।’’

अदालत अगले हफ़्ते इस मामले की सुनवाई करेगी।

कश्यप और टीवी टुडे ने मुकदमे में कहा है कि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद, 29 मई को आज तक समाचार चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकार ने यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की विश्वसनीयता को लेकर एक वाजिब चिंता ज़ाहिर की थी।

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादियों — यानी शिक्षकों और शैक्षणिक मंच चलाने वालों ने ‘‘साफ-सुथरी आलोचना की सीमा पार कर दी’’ और 30 मई से 4 जून के बीच सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए कश्यप के चरित्र, ईमानदारी और पेशेवर प्रतिष्ठा पर व्यक्तिगत हमले किए।

प्रतिवादियों का दावा है कि कथित मानहानि वाले पोस्ट सिर्फ़ नेटवर्क के एक चैनल पर कश्यप के कार्यक्रम के जवाब में किए गए थे।

वादी ने खान सर और अन्य लोगों से हर्जाने के तौर पर 2 करोड़ रुपये की मांग की है।

साथ ही, प्रतिवादियों को कोई भी अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने का भी अनुरोध किया गया।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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