Indore High Court News: “न तो बिजली है और न ही शिक्षक…” प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर HC सख्त, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस, जानिए क्या कहा?

Indore High Court News: मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अधिकार के उल्लंघन पर जवाब मांगा है।

Indore High Court News: “न तो बिजली है और न ही शिक्षक…” प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर HC सख्त, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस, जानिए क्या कहा?

Indore High Court/Photo Credit: Social Media

Modified Date: July 2, 2026 / 01:53 pm IST
Published Date: July 2, 2026 1:52 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया
  • याचिका के अनुसार, प्रदेश में 1.15 लाख से अधिक शिक्षक पद खाली हैं और 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है
  • मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी, जिसमें सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया है

इंदौर। Indore High Court News: मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, बिजली-पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने शिक्षा के अधिकार के गंभीर उल्लंघन पर विस्तृत जवाब मांगा है।

1 लाख 15 हजार से अधिक पद खाली

इंदौर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा उठाया गया। याचिका में बताया गया कि मध्यप्रदेश में स्वीकृत 2 लाख 89 हजार शिक्षक पदों में से 1 लाख 15 हजार से अधिक पद खाली हैं। यानी प्रदेश में करीब 40 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त हैं। यही नहीं, 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इन आंकड़ों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

10 हजार स्कूलों में बिजली नहीं

Indore High Court News याचिका में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि करीब 10 हजार सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि 3,400 स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं। हजारों स्कूल अब भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। वहीं करीब 5 हजार स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं और 40 हजार से ज्यादा स्कूलों में बाउंड्रीवाल तक नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति बच्चों के शिक्षा के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

Indore High Court News मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता बी.एल. जैन की ओर से अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने पक्ष रखा। कुलमिलाकर सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर पर हाईकोर्ट की सख्ती ने एक बार फिर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर सरकार के उस जवाब पर होगी, जो 17 अगस्त को हाईकोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.