अन्नाद्रमुक के एक और विधायक का इस्तीफा, पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील

अन्नाद्रमुक के एक और विधायक का इस्तीफा, पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील

अन्नाद्रमुक के एक और विधायक का इस्तीफा, पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील
Modified Date: May 26, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: May 26, 2026 4:35 pm IST

(परिवर्तित स्लग के साथ)

चेन्नई, 26 मई (भाषा) अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी खेमे के चौथे विधायक ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा से इस्तीफा दे दिया, जिससे 234 सदस्यीय सदन में विपक्षी दल की संख्या 47 से घटकर 43 रह गई।

अंबासमुद्रम के विधायक ई. सुबैया ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। यह घटनाक्रम अन्नाद्रमुक प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी खेमे द्वारा विधानसभा अध्यक्ष से 25 मई को इस्तीफा दे चुके तीन विधायकों के त्यागपत्र न स्वीकार करने के अनुरोध के बाद सामने आया।

प्रभाकर ने बाद में कहा कि सुबैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।

पलानीस्वामी गुट ने विधायकों के इस कदम के पीछे कथित कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला दिया और विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वह उन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार न करें।

पार्टी का दावा है कि तीनों विधायक इस्तीफा अधिसूचित होने से पहले ही सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे।

सुबैया, सी वी षणमुगम-एस पी वेलुमणि खेमे के चौथे विधायक हैं जिन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया है। सुबैया ने कहा कि उन्होंने यह कदम अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के हित में उठाया है।

तमिलगा वेत्री कषगम में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिलना कोई पाप नहीं है। मौका मिला तो मिलूंगा।’’

इस्तीफे के तुरंत बाद वह टीवीके नेता एवं राज्य मंत्री एन. आनंद के साथ नजर आए।

अन्नाद्रमुक खेमे में जारी घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस सांसद एस जोतिमणि ने तमिलनाडु में विधायकों की कथित ‘‘खरीद-फरोख्त’’ पर चिंता व्यक्त की और कहा कि उनकी पार्टी को सत्तारूढ़ टीवीके के इस तरह के कदमों का समर्थन नहीं करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी खुद भी इस तरह के हथकंडों का शिकार रही है।

टीवीके नेता और राजस्व मंत्री के.ए. सेंगोत्तैयान ने विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोपों का खंडन किया।

विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि वह कानूनी ढांचे और अपने अधिकारों के भीतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह निर्धारित प्रारूप में आए इस्तीफे स्वीकार करते हैं।

इससे पूर्व अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ ‘सचेतक’ अग्री एसएस कृष्णमूर्ति और राज्यसभा सदस्य आईएस इनबादुरई ने अध्यक्ष प्रभाकर से मुलाकात की और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा तथा उनसे अनुरोध किया कि वह मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा और एस जयकुमार के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करें जिसे बाद में सरकारी राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया है।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि विश्वास मत परीक्षण में सरकार के खिलाफ मतदान करने के पार्टी के आदेश का उल्लंघन करने वाले 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की उनकी पिछली अर्जी अध्यक्ष के समक्ष लंबित है और वह संबंधित विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते।

उन्होंने दावा किया कि इस्तीफा देने के पांच मिनट के भीतर ही सचिवालय में तीनों को ‘‘टीवीके की सदस्यता का लेमिनेटेड कार्ड’’ दे दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग पूछ रहे हैं कि यह सचिवालय है या टीवीके का मुख्यालय।’’

कुमारवेल, सत्याभामा और जयकुमार ने सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा दिया था और बाद में टीवीके में शामिल हो गए थे, जिसे द्रमुक और अन्नाद्रमुक, दोनों ने ‘‘दलबदल’’ करार दिया।

अध्यक्ष ने शुरू में सुबैया का त्यागपत्र यह कहकर लौटा दिया कि वह नियमों के अनुरूप नहीं है। इस पर सुबैया ने तत्काल टाइप किया हुआ पत्र वापस लिया और कुछ ही मिनट में हस्तलिखित पत्र सौंप दिया, जिसे प्रभाकर ने स्वीकार कर लिया।

टीवीके के एक सूत्र ने बताया कि कुमारवेल, सत्याभामा और जयकुमार को आगामी उपचुनावों में पार्टी की तरफ से टिकट मिलने की संभावना है।

इन घटनाक्रमों के बाद षणमुगम-वेलुमणि खेमे ने अपनी बैठक बुलाई।

भाषा खारी माधव

माधव


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