एक और विधायक ने अन्नाद्रमुक छोड़ी; पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील

एक और विधायक ने अन्नाद्रमुक छोड़ी; पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील

एक और विधायक ने अन्नाद्रमुक छोड़ी; पलानीस्वामी गुट ने अध्यक्ष से की अपील
Modified Date: May 26, 2026 / 04:03 pm IST
Published Date: May 26, 2026 4:03 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

चेन्नई, 26 मई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी गुट के चौथे विधायक ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे कुछ ही समय पहले पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले गुट ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात कर 25 मई को इस्तीफा देने वाले तीन अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया था।

पलानीस्वामी गुट ने विधायकों के इस कदम के पीछे कथित कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला दिया और विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वह उन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार न करें।

पार्टी का दावा है कि तीनों विधायक इस्तीफा अधिसूचित होने से पहले ही सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे।

उक्त अर्जी के साथ पलानीस्वामी गुट द्वारा विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने के तुरंत बाद सीवी षणमुगम-एसपी वेलुमणि गुट से एक और बागी विधायक एसाकी सुबाया ने अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके भी सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल होने की संभावना है।

अन्नाद्रमुक खेमे में जारी घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस सांसद एस जोतिमणि ने तमिलनाडु में विधायकों की कथित ‘‘खरीद-फरोख्त’’ पर चिंता व्यक्त की और कहा कि उनकी पार्टी को सत्तारूढ़ टीवीके के इस तरह के कदमों का समर्थन नहीं करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी खुद भी इस तरह के हथकंडों का शिकार रही है।

विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने जोर देकर कहा कि वह कानूनी ढांचे और उन्हें मिली शक्तियों के दायरे में रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।

टीवीके नेता और राजस्व मंत्री के.ए. सेंगोत्तैयान ने विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोपों का खंडन किया।

इससे पूर्व अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ ‘सचेतक’ अग्री एसएस कृष्णमूर्ति और राज्यसभा सदस्य आईएस इनबादुरई ने अध्यक्ष प्रभाकर से मुलाकात की और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा तथा उनसे अनुरोध किया कि वह मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा और एस जयकुमार के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करें जिसे बाद में सरकारी राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया है।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि विश्वास मत परीक्षण में सरकार के खिलाफ मतदान करने के पार्टी के आदेश का उल्लंघन करने वाले 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की उनकी पिछली अर्जी अध्यक्ष के समक्ष लंबित है और वह संबंधित विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने पलानीस्वामी के विश्वास मत संबंधी आदेश का उल्लंघन करने के लिए दलबदल विरोधी कानून के तहत अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया था। अध्यक्ष ने कहा था कि यह मामला उनके विचाराधीन है। दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई के डर से तीनों विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। जब हमारी पिछली याचिका लंबित है, तो अध्यक्ष द्वारा उनके इस्तीफे स्वीकार करना नियमों का उल्लंघन है। हमने अन्नाद्रमुक की ओर से मंगलवार को एक याचिका दायर कर कहा कि उन्हें उनका (इस्तीफा देने वाले विधायकों का) इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहिए।’’

उन्होंने दावा किया कि इस्तीफा देने के पांच मिनट के भीतर ही तीनों व्यक्तियों को ‘‘टीवीके सदस्यता कार्ड’’ दे दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग पूछ रहे हैं कि यह सचिवालय है या टीवीके का मुख्यालय। अगर यह सरकार इस तरह के इस्तीफों को बढ़ावा देती है, तो विधायकों की खरीद-फरोख्त बढ़ जाएगी; सरकार को इसे रोकने के लिए आगे आना चाहिए।’’

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने स्वच्छ शासन का वादा किया था।

वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया, ‘‘पिछले दरवाजे से अपना शासन स्थापित करने के लिए यह सरकार द्रुत गति से विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही है।’’

अन्नाद्रमुक के अधिवक्ता शाखा के सचिव इनबादुराई ने कहा कि उनकी ओर से दलबदल विरोधी कानून के तहत बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है और यह याचिका अभी लंबित है। उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी मुद्दा यह है कि ऐसी परिस्थितियों में अध्यक्ष उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस्तीफे की अधिसूचना से पहले उन्होंने टीवीके के एक मंत्री से मुलाकात की… और देर शाम औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने का नाटक किया। फिर भी उनके इस्तीफे की अधिसूचना (सरकारी राजपत्र में) नहीं आई है। इसलिए हमने मांग की है कि उनका इस्तीफा स्वीकार न किया जाए।’’

उन्होंने कहा कि जब किसी के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की जाती है, तो विधायक इस्तीफा नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, ‘‘आप पिछले दरवाजे से बचकर नहीं निकल सकते।’’

बागी विधायकों में से तीन – मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा और एस जयकुमार ने सोमवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और बाद में टीवीके में शामिल हो गए, जिसे प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ दलों – द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्नाद्रमुक ने ‘‘विधायकों की खरीद-फरोख्त’’ करार दिया है।

इस बीच, अंबासमुद्रम (तिरुनेलवेली) से अन्नाद्रमुक विधायक एसाकी सुबाया ने अध्यक्ष को अपना इस्तीफा पत्र सौंप दिया, जिससे वह दो दिनों में ऐसा करने वाले पार्टी के चौथे विधायक बन गए। सुबाया भी बागी खेमे से ताल्लुक रखते हैं।

नियमों के अनुरूप नहीं होने के कारण अध्यक्ष ने पहले तो इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, लेकिन इसके तुरंत बाद सुबया ने टाइप किया हुआ पत्र वापस ले लिया और कुछ ही मिनटों में हस्तलिखित पत्र प्रस्तुत किया जिसे प्रभाकर ने स्वीकार कर लिया।

सुबाया उन बागी विधायकों में शामिल हैं जिन्होंने राज्य के पूर्व मंत्रियों सी. वी षणमुगम और एस. पी. वेलुमणि का समर्थन किया था और 13 मई को विधानसभा में विश्वास मत परीक्षण के दौरान टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था।

टीवीके के एक सूत्र ने बताया कि कुमारवेल, सत्यभामा और जयकुमार को आगामी उपचुनाव में पार्टी के ‘सीटी’ चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिलने की संभावना है।

इन घटनाक्रमों के बाद, षणमुगम-वेलुमणि खेमे में बैठक हुई।

इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘मेरा काम यह देखना है कि (इस्तीफा) पत्र उचित है या नहीं और कानूनी ढांचे के भीतर रहकर उसे स्वीकार करना है। मैं सदन के नियमों का पालन कर रहा हूं।’’

अन्नाद्रमुक ने तीन पन्नों का पत्र दिया है और उन्हें इसे ध्यानपूर्वक पढ़ना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी कोई निजी इच्छा या लालसा नहीं है और मैं नियमों के अनुसार काम करूंगा।’’

कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने राज्य में विधायकों की कथित ‘‘खरीद-फरोख्त’’ की कड़ी आलोचना की और कहा कि पार्टी तमिलनाडु और अन्य राज्यों के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं अपना सकती।

जोतिमणि ने कहा कि टीवीके द्वारा उठाए गए कदमों का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में किसी भी भिन्न मत को सामने रखना कांग्रेस पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अगर कांग्रेस का कोई सदस्य विधायकों की खरीद-फरोख्त को सही ठहराता है तो यह गलत होगा। लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए भाजपा ने सबसे पहले जिस हथियार का इस्तेमाल किया, वह यही ‘विधायकों की खरीद-फरोख्त’ थी तथा इसे उसने पार्टी की निर्वाचित सरकारों के खिलाफ इस्तेमाल किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी तमिलनाडु में विधायकों की खरीद-फरोख्त का समर्थन करने और राज्य के बाहर इसका विरोध करने का दोहरा रुख कभी नहीं अपना सकती। अगर कांग्रेस लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकत के रूप में काम करती है, तो यह गांधी, नेहरू और उनकी विचारधारा के साथ विश्वासघात होगा।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी अपने सिद्धांतों से ‘‘समझौता नहीं करने’’ के लिए अडिग संघर्ष कर रहे हैं।

कांग्रेस ने 23 अप्रैल के चुनाव के बाद द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन से बाहर निकलकर पहली बार बनी टीवीके सरकार का समर्थन किया था। पार्टी अब विजय के नेतृत्व वाली कैबिनेट का हिस्सा है और उसके दो मंत्री हैं।

इस बीच, मंत्री के. ए. सेंगोत्तैयान ने राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिशों से इनकार किया।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य जानता है कि किसने विधायकों की खरीद-फरोख्त की, किसने द्रमुक की मदद से मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की।’’ उनका इशारा पलानीस्वामी की ओर था।

यह बात उन्होंने द्रमुक और अन्नाद्रमुक द्वारा चुनाव के बाद टीवीके सरकार को रोकने के लिए हाथ मिलाने की योजनाओं की खबरों के बीच कही।

जब उनसे पूछा गया कि क्या टीवीके में शामिल हुए अन्नाद्रमुक के इस्तीफा देने वाले विधायकों को उन्हीं सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा, जहां से वह पहले चुनाव लड़े थे तो उन्होंने कहा, ‘‘समय बताएगा।’’

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


लेखक के बारे में