सिख विरोधी दंगे: सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी डीएसजीएमसी

सिख विरोधी दंगे: सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी डीएसजीएमसी

सिख विरोधी दंगे: सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी डीएसजीएमसी
Modified Date: January 22, 2026 / 07:41 pm IST
Published Date: January 22, 2026 7:41 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।

राउज एवेन्यू जिला अदालत ने कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के जनकपुरी क्षेत्र में हिंसा भड़काने से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने एक बयान में कहा कि एक-दो नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या कर दी गई थी और इस मामले में पांच गवाहों ने बयान दर्ज कराए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि हत्याओं के लिए जिम्मेदार भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे, इसके बावजूद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

डीएसजीएमसी पदाधिकारियों ने कहा कि फैसले की प्रति मिलने के बाद उसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और फिर उच्च न्यायालय में उसे चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में गवाहों के बयान दर्ज कराकर समिति यह सुनिश्चित करेगी कि कुमार को इस मामले में भी सजा मिले।

डीएसजीएमसी ने एक बयान में कहा, “रविंदर सिंह कोहली की मौत हो चुकी है, इसलिए उनकी गवाही दर्ज नहीं की जा सकी। कोहली इस मामले में मुख्य गवाह थे, जिनके सामने भीड़ ने उनके साथियों अवतार सिंह और सोहन सिंह की हत्या कर दी थी। कोहली की गवाही बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन उनकी मौत के कारण बयान दर्ज नहीं किए जा सके।”

बयान में कहा गया है कि अदालत के फैसले से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, क्योंकि 42 साल बाद भी आरोपी को बरी किया जा बेहद दुखद है।

डीएसजीएमसी ने कुमार पर उनके तत्कालीन संसदीय क्षेत्र पश्चिम दिल्ली में भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया। उसने कहा, “अन्य मामलों में दी गई आजीवन कारावास की सजा, जिसे वह पहले से ही काट रहे हैं, यह साबित करती है कि सज्जन कुमार ही भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।”

भाषा पारुल नरेश

नरेश


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