तमिलनाडु की सहमति के बिना लिया गया कोई भी निर्णय मंजूर नहीं: स्टालिन ने परिसीमन पर कहा

तमिलनाडु की सहमति के बिना लिया गया कोई भी निर्णय मंजूर नहीं: स्टालिन ने परिसीमन पर कहा

तमिलनाडु की सहमति के बिना लिया गया कोई भी निर्णय मंजूर नहीं: स्टालिन ने परिसीमन पर कहा
Modified Date: April 8, 2026 / 06:38 pm IST
Published Date: April 8, 2026 6:38 pm IST

चेन्नई, आठ अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बुधवार को कहा कि दक्षिणी राज्यों ने निष्पक्ष परिसीमन की मांग की है और उनका राज्य इस विषय पर केंद्र द्वारा उसकी सहमति के बिना लिए गए किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने आगाह किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘‘शांत दक्षिण को तूफान में नहीं बदलना चाहिए’’ और प्रधानमंत्री से कई सवाल किये।

स्टालिन ने ‘एक्स’ पर ‘‘परिसीमन का खतरा: क्या भारत तानाशाही की ओर बढ़ रहा?’’ शीर्षक से एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को दक्षिण (भारत) की जनता द्वारा उठाए गए इन उचित और महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देना चाहिए।’’

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख ने जानना चाहा कि केंद्र की भाजपा सरकार परिसीमन प्रक्रिया को गोपनीय क्यों रख रही है। उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इसे कैसे पूरा करने का इरादा रखती है।’’

स्टालिन ने सवाल किया, ‘‘2001 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री (अटल बिहारी) वाजपेयी ने राष्ट्र हित में परिसीमन को 25 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया था। आज दक्षिणी राज्यों की उसी राह पर चलने की न्यायसंगत और उचित मांग पर प्रधानमंत्री मोदी का क्या जवाब है?’’

उन्होंने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों के बीच, संसद का विशेष सत्र बुलाने के समय पर सवाल उठाया और पूछा कि केंद्र सरकार ने 29 अप्रैल के बाद ही विशेष सत्र बुलाने संबंधी विपक्षी नेताओं की उचित और तर्कसंगत मांग को क्यों नजरअंदाज कर दिया।

द्रमुक प्रमुख ने दावा किया, ‘‘आप क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं? सर्वदलीय परामर्श के बिना दूरगामी संवैधानिक संशोधनों को जबरदस्ती लागू करना तानाशाही से कम नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘द्रमुक चुपचाप बैठकर यह नहीं देखेगी कि दक्षिणी राज्यों के अधिकारों को दांव पर लगाकर उत्तरी राज्यों को अधिक शक्ति दी जाए। यह यहां रहने वाले लोगों का भविष्य है। हमारी सहमति के बिना, हमसे परामर्श किए बिना लिया गया कोई भी निर्णय किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगा।’’

स्टालिन ने कहा कि विपक्ष और मीडिया द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दिया जा रहा है और उन्होंने जानना चाहा कि क्या प्रधानमंत्री जनता के सवालों का जवाब देंगे।

भाषा सुभाष माधव

माधव


लेखक के बारे में