नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें असम में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची से बाहर किये गए लोगों के लिए अपील प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को देने का अनुरोध किया गया है।
असम राज्य जमीयत उलेमा की ओर से दायर याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि लोग परेशान हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों को (प्रकाशित एनआरसी से) बाहर किया गया है, उनके लिए अपील का प्रावधान है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।’’ उन्होंने कहा कि इसी तरह का एक अलग मामला उच्चतम न्यायालय में पहले से लंबित है।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’ न्यायालय ने इस याचिका को पहले से लंबित याचिका के साथ संलग्न कर दिया।
न्यायालय ने केंद्र और अन्य पक्षों — जिनमें असम सरकार और राज्य समन्वयक का कार्यालय भी शामिल है — से जवाब मांगा है।
असम के वास्वतिक भारतीय नागरिकों की पहचान करने वाली अद्यतन एनआरसी 31 अगस्त 2019 को जारी की गई थी। इस प्रक्रिया में 19 लाख से अधिक आवेदकों के नागरिकता के दावों को खारिज कर दिया गया।
एनआरसी राज्य समन्वयक कार्यालय के एक बयान के अनुसार, कुल 3,30,27,661 (3.3 करोड़) लोगों ने एनआरसी में शामिल किए जाने के लिए आवेदन किया था। इनमें से 3,11,21,004 (3.1 करोड़) लोगों के नाम दस्तावेज में शामिल किए गए, जबकि 19,06,657 (19.06 लाख) लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया।
अपनी याचिका में असम राज्य जमीयत उलेमा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है कि वे नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 14ए और इसके साथ पढ़े जाने वाले 2003 के नियमों के नियम 13 के तहत असम में प्रकाशित अंतिम एनआरसी में शामिल सभी व्यक्तियों को तुरंत राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करें।
याचिका में यह भी अपील की गई है कि असम में प्रकाशित अंतिम एनआरसी से बाहर किये गए लोगों के लिए अधिकारियों को अपील प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया जाए।
भाषा सुभाष नरेश
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