असम चुनाव: भारी जनादेश से उम्मीदें बढ़ीं, भाजपा को मिली नयी राजनीतिक ताकत

असम चुनाव: भारी जनादेश से उम्मीदें बढ़ीं, भाजपा को मिली नयी राजनीतिक ताकत

असम चुनाव: भारी जनादेश से उम्मीदें बढ़ीं, भाजपा को मिली नयी राजनीतिक ताकत
Modified Date: May 5, 2026 / 12:19 pm IST
Published Date: May 5, 2026 12:19 pm IST

गुवाहाटी, पांच मई (भाषा) असम में मिले भारी जनादेश से उत्साहित भाजपा संभवत: राज्य में हिंदुत्व पर अपना ध्यान केंद्रित करती रहेगी। हालांकि पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे असमिया क्षेत्रवाद हाशिए पर जा सकता है, जबकि कई मतदाता पार्टी की शानदार जीत का श्रेय कल्याणकारी योजनाओं को देते हैं।

कल्याणकारी योजनाएं जहां सत्तारूढ़ गठबंधन की जीत में अहम रहीं वहीं अब उन वादों को पूरा करना महत्वपूर्ण है जो नयी सरकार के लिए वित्तीय परीक्षा तथा चुनौती भी बन सकते हैं।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा है, क्योंकि उसने 126 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 102 सीट जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने हाल के समय का अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिन 90 सीट पर चुनाव लड़ा उनमें से 82 पर जीत हासिल की जबकि उसके सहयोगी दलों – बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 11 सीट पर चुनाव लड़ा और 10 सीट पर जीत हासिल की तथा असम गण परिषद (अगप) ने 26 सीट पर चुनाव लड़ा जबकि 10 सीट पर जीत दर्ज की।

भाजपा ने राज्य में पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया। इससे पहले उसने 2021 और 2016 में 60 सीट जीती थीं।

राजनीतिक विश्लेषक ब्रजेन डेका ने कहा, ‘‘जब 2023 में परिसीमन हुआ था तब भाजपा ने कहा था कि उसने हिंदुओं के लिए 103 से 105 सीट सुरक्षित कर ली हैं। हिंदुओं के हितैषी होने की उसकी छवि को देखते हुए यह परिणाम भी अपेक्षित ही है।’’

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भाजपा ने खुद को असमिया समुदाय के ‘‘अंतिम रक्षक’’ के रूप में भी पेश किया है और पार्टी का अकेले 80 सीट का आंकड़ा पार करना यह दर्शाता है कि जनता ने उसे इस भूमिका में स्वीकार कर लिया है।

डेका ने कहा, ‘‘इससे राज्य की ‘जातीयवादी’ (क्षेत्रीय) ताकतें, चाहे वो अगप हो या रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसी विपक्षी पार्टियां, वे प्रभावी रूप से हाशिए पर चली गई हैं। लोगों ने भाजपा को ही समुदाय के भविष्य को सुरक्षित करने वाली पार्टी के रूप में स्वीकार कर लिया है।’’

इस चुनाव में रायजोर दल की सीट की संख्या बढ़कर दो हो गई, जबकि अगप एक बार फिर असफल रही। दोनों ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थीं।

डेका ने कहा, ‘‘भाजपा की जीत मुसलमानों, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों को और भी अलग-थलग कर देगी जो मुख्यमंत्री के तीखे हमलों का शिकार रहे हैं।’’

राजनीतिक विश्लेषक ने यह भी बताया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) जिसे ‘मिया’ समुदाय का रक्षक माना जा रहा था, उसे भी समुदाय ने नकार दिया है क्योंकि पार्टी इस बार केवल दो सीट ही जीत पाई।

‘मिया’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है और गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी अप्रवासी मानते हैं।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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