अयोध्या मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपियों में शिक्षक, कार मैकेनिक और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी शामिल

अयोध्या मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपियों में शिक्षक, कार मैकेनिक और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी शामिल

अयोध्या मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपियों में शिक्षक, कार मैकेनिक और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी शामिल
Modified Date: July 5, 2026 / 07:05 pm IST
Published Date: July 5, 2026 7:05 pm IST

अयोध्या (उप्र), पांच जुलाई (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में प्राथमिक विद्यालय का एक शिक्षक, एक पूर्व कार मैकेनिक, एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी, दान की गिनती करने वाले ठेके के कर्मचारी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का भरोसेमंद सहयोगी शामिल हैं।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि अलग-अलग पेशे और सामाजिक पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, आरोपियों ने मंदिर के दान प्रबंधन व्यवस्था में अपनी भूमिका का फायदा उठाकर समय-समय पर चढावे की नकदी को ‘‘हड़प’’ लिया। विशेष जांच दल उनके वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और इस कथित साजिश में उनकी अलग-अलग भूमिकाओं की जांच कर रहा है।

गिरफ्तार लोगों में शिक्षक अविनाश शुक्ला भी शामिल हैं, जिन्हें चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी के मिलान का काम सौंपा गया था।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि उनसे जुड़ी जगहों से 20 लाख रुपये से ज़्यादा नकद, विदेशी मुद्रा और गहने बरामद किए गए हैं, जो सभी आरोपियों में सबसे बड़ी बरामदगी है।

पूछताछ के दौरान, अविनाश ने कथित तौर पर बताया कि कैसे सीसीटीवी के ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (जो कैमरे की कवरेज में नहीं हैं) का फायदा उठाकर और कुछ समय के लिए शौचालय में नकद छिपाकर गिनती केंद्र से नोट निकाले जाते थे।

अन्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा, एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए मंदिर की दान-गिनती इकाई में ठेका कर्मी के तौर पर काम करते थे। अयोध्या के मिल्कीपुर इलाके के बसावन गांव के रहने वाले अनुकल्प कथित तौर पर महीने में लगभग 15,000 रुपये कमाते थे।

पुलिस अनुकल्प की कथित तौर पर बनाई गई संपत्ति की जांच कर रही है, जिसमें लगभग 65 लाख रुपये कीमत का घर, अपने गांव में एक फार्म हाउस, एक प्रीमियम मोटरसाइकिल और बुक की गई महंगी कार शामिल है।

पुलिस का मानना है कि ये चीजें उनकी ज्ञात आय के मुकाबले बहुत ज़्यादा हैं। उनसे जुड़ी तलाशी के दौरान कथित तौर पर लगभग 16.8 लाख रुपये नकद बरामद किया गया।

पुलिस मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के साथ उनके कथित पारिवारिक रिश्ते और सह-आरोपी व जीजा लवकुश मिश्रा के साथ उनकी करीबी दोस्ती की भी जांच कर रही है।

लवकुश मिश्रा को भी दान की गिनती के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के ज़रिए रखा गया था, वह पहले ऑटोमोबाइल मैकेनिक के तौर पर काम करते थे और महीने में लगभग 10,000-12,000 रुपये कमाते थे।

मिनापुर फगौली गांव के रहने वाले इस व्यक्ति ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि वह दान की रकम के गबन में शामिल थे और पुलिस उनके अनुकल्प मिश्रा के साथ संबंधों और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के साथ कथित पारिवारिक संपर्कों की जांच कर रही है।

पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान लवकुश के पास से करीब 14.25 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

दान की गिनती करने वाले एक और संविदा कर्मचारी रामशंकर मिश्रा पर आरोप है कि वह सुरक्षित काउंटिंग रूम के अंदर नकद संभालते थे और दान की रकम को हड़पने की साजिश का हिस्सा थे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रामशंकर से जुड़ी तलाशी के दौरान करीब 7.3 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

अधिकारियों ने गणना के काम में रामशंकर की भूमिका के अलावा उनकी निजी पृष्‍ठभूमि के बारे में बहुत कम जानकारी दी है।

पुलिस सूत्रों ने रामशंकर यादव, जिन्हें लोग टिन्नू यादव के नाम से जानते हैं, को इस कथित साजिश के मुख्य लोगों में से एक बताया है। शुरू में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निजी चालक के तौर पर नियुक्त किए गए टिन्नू यादव बाद में मंदिर प्रशासन और अति विशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी भूमिका में आ गये।

पुलिस का दावा है कि यादव के पास दान की गिनती वाले कमरे और दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत पहुंच थी, जिससे वह गिनती की प्रक्रिया में हेरफेर कर सकते थे।

मंदिर की दान-गिनती टीम में काम करने वाले मनीष कुमार यादव को टिन्नू यादव का भतीजा बताया जाता है।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि मनीष को यह काम पारिवारिक संबंधों के कारण मिला था और वह गणना कक्ष के अंदर नकदी संभालने में शामिल थे।

पुलिस ने बताया कि मनीष से जुड़ी तलाशी के दौरान नकद बरामद किया गया और उसके वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को मंदिर ट्रस्ट ने धार्मिक सुविधा केन्द्र में दान की गिनती की निगरानी के लिए नियुक्त किया था। बैंकिंग अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने गिनती की पालियों की देखरेख की और खबरों में उनके स्थानीय आरएसएस पदाधिकारी के तौर पर भी पहचाना गया है।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि श्रीवास्तव गड़बड़ियों को रोकने में नाकाम रहे और कथित गबन में मदद करने में उनकी भूमिका थी।

आउटसोर्सिंग एजेंसी के ज़रिए रखे गए एक और संविदा कर्मचारी करुणेश पांडे को दान में मिले नकद को खोलने, छांटने और गिनने का काम सौंपा गया था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पांडे भी चढ़ावा राशि हड़पने की साजिश में शामिल था और दावा किया कि उससे जुड़ी तलाशी के दौरान 18 लाख रुपये से ज्यादा नकद बरामद किया गया।

भाषा चंदन आनन्द शफीक

शफीक


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