फर्जी खाते के जरिए साइबर धोखाधड़ी में मदद करने के आरोप में दिल्ली में बैंक कर्मचारी गिरफ्तार
फर्जी खाते के जरिए साइबर धोखाधड़ी में मदद करने के आरोप में दिल्ली में बैंक कर्मचारी गिरफ्तार
नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) फर्जी दस्तावेजों की मदद से बैंक खाता खोलकर साइबर धोखाधड़ी गिरोह की मदद करने के आरोप में 35 वर्षीय एक बैंक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी रविवार को एक अधिकारी ने दी।
पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद निवासी इरशाद मलिक एक निजी बैंक में कार्यरत था और उस पर आरोप है कि फर्जी खाते के माध्यम से धन की हेराफेरी में उसने जालसाजों की मदद की।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला अक्टूबर 2023 में द्वारका में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से संबंधित है, जो एक पुलिस अधिकारी की शिकायत के बाद दर्ज की गई थी।
शिकायत में अधिकारी ने अपनी सहमति या ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) प्रमाणीकरण के बिना अपने खाते से 88,000 रुपये की अनधिकृत निकासी का आरोप लगाया था।
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि यह राशि एक निजी फर्म के नाम पर खोले गए एक निजी बैंक खाते में भेजी गई थी।
इस संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘जांच में पता चला कि मनमोहन सिंह नामक एक व्यक्ति के दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी से खाता खोला गया था, जिसने ऐसे किसी खाते के बारे में जानकारी होने से इनकार किया।’’
फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की जांच में पता चला कि खाता खोलने के फॉर्म पर किए गए हस्ताक्षर जाली थे और खाता उचित केवाईसी सत्यापन के बिना खोला गया था।
पुलिस ने बताया कि मलिक सह-आरोपी हरजिंदर उर्फ हरजी के संपर्क में आया, जिसने उसे कमीशन के बदले ऐसे खातों को संचालित करने में मदद करने को कहा।
अधिकारी ने कहा कि विशिष्ट सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए, टीम ने 10 अप्रैल को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से मलिक को गिरफ्तार कर लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘पूछताछ के दौरान, उसने जानबूझकर जाली दस्तावेजों पर खाता खोलने और धोखाधड़ी से प्राप्त धन को इधर-उधर भेजने के लिए कमीशन लेने की बात स्वीकार की।’’
जांचकर्ताओं ने कहा कि इस खाते का इस्तेमाल एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट में किया गया, जहां पीड़ितों को फर्जी निवेश और अंशकालिक नौकरी के प्रस्तावों के साथ सोशल मीडिया मंच समूहों के माध्यम से लुभाया गया था।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में चार सह-आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और वे फिलहाल जमानत पर हैं।
भाषा नेत्रपाल सुभाष
सुभाष

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