बेहबल कलां पुलिस गोलीबारी मामला : शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल एसआईटी के समक्ष पेश हुए

बेहबल कलां पुलिस गोलीबारी मामला : शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल एसआईटी के समक्ष पेश हुए

बेहबल कलां पुलिस गोलीबारी मामला : शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल एसआईटी के समक्ष पेश हुए
Modified Date: July 20, 2026 / 05:31 pm IST
Published Date: July 20, 2026 5:31 pm IST

चंडीगढ़, 20 जुलाई (भाषा) वर्ष 2015 के बेहबल कलां पुलिस गोलीबारी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से सोमवार को करीब दो घंटे तक पूछताछ की।

बादल को उप पुलिस महानिरीक्षक (बठिंडा रेंज) हरजीत सिंह नीत एसआईटी ने सेक्टर-32 स्थित पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (पीपीओआई) में पेश होने के लिए तलब किया था। बादल ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार ने राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए इस एसआईटी का गठन किया है।

बादल के पहुंचने से पहले पीपीओआई के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। चंडीगढ़ पुलिस ने आयोजन स्थल की ओर जाने वाली सड़कों पर अवरोधक लगा दिए थे, जहां पूर्व विधायक एन. के. शर्मा समेत शिअद नेताओं और पार्टी समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ था। एकत्र अकाली समर्थकों ने शिअद प्रमुख के समर्थन में नारेबाजी की।

बादल अपने सेक्टर-9 स्थित आवास से पीपीओआई के लिए रवाना हुए तो उनके साथ पार्टी नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और बलविंदर सिंह भुंडर भी मौजूद थे।

बादल सुबह करीब 11:25 बजे पीपीओआई पहुंचे और उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई।

पूछताछ के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बादल ने कहा कि उन्हें चौथी बार तलब किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी मुझे बुलाया गया, मैं पेश हुआ क्योंकि शिअद अध्यक्ष के रूप में मेरी इच्छा है कि असली दोषियों को पकड़ा जाए।’’

शिअद अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन यहां एसआईटी का गठन दोषियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए किया गया है।’’

उन्होंने कहा कि करीब 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन पंजाब पुलिस की एसआईटी अपनी जांच पूरी नहीं कर पाई है।

बादल ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘वे मीडिया में यह दिखाना चाहते हैं कि बादल को तलब किया गया है। इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।’’

मान सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि पूरा पंजाब मुख्यमंत्री के खिलाफ है और आरोप लगाया कि आप ने राज्य को ‘‘लूटा’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक नाटक है। शिअद न तो डरा है और न ही झुकेगा।’’

एसआईटी के समक्ष पेश होने से पहले मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में बादल ने आप सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अकाली दल से ‘डरी हुई’ है और इसलिए नाटक कर रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्ष से बेअदबी मुद्दे को लेकर केवल राजनीति की जा रही है और अब तक न्याय नहीं हो पाया है।

फरीदकोट में वर्ष 2015 में बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारे से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति चोरी होने, बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में हाथ से लिखे बेअदबी वाले पोस्टर लगाए जाने तथा पवित्र ग्रंथ के फटे हुए पन्ने मिलने जैसी घटनाएं हुई थीं।

इन घटनाओं के बाद अक्टूबर 2015 में फरीदकोट में बेअदबी के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में बेहबल कलां में दो लोगों-गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह की मौत हो गई थी, जबकि फरीदकोट के कोटकपूरा में कुछ लोग घायल हुए थे।

उस समय पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की सरकार थी। दिवंगत प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे, जबकि उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृह विभाग भी संभाल रहे थे।

सूत्रों ने बताया था कि विशेष जांच दल अक्टूबर 2015 में पुलिस कार्रवाई से पहले हुई घटनाओं के क्रम की जांच कर रहा है।

सूत्रों ने पहले कहा था कि पूर्व शिअद विधायक मंतर बराड़ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री, तत्कालीन गृह मंत्री और तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से बातचीत की थी।

सूत्रों ने बताया था कि प्रकाश सिंह बादल के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश रात के समय आया था।

पिछले महीने पंजाब आप नेता बलतेज सिंह पन्नू ने कहा था कि पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसआईटी के समक्ष अपने बयान में कहा था कि बादल ने पिछली अकाली सरकार के दौरान हुई गोलीबारी की घटना की ‘‘जिम्मेदारी स्वीकार’’ की थी। उन्होंने कहा था कि यह बात बादल ने सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के समक्ष कही थी।

भाषा तान्या अविनाश

अविनाश


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