बंगाल चुनाव : भाजपा के लिए ‘परिवर्तन यात्रा’ संगठनात्मक ताकत की परीक्षा

बंगाल चुनाव : भाजपा के लिए ‘परिवर्तन यात्रा’ संगठनात्मक ताकत की परीक्षा

बंगाल चुनाव : भाजपा के लिए ‘परिवर्तन यात्रा’ संगठनात्मक ताकत की परीक्षा
Modified Date: February 27, 2026 / 12:36 pm IST
Published Date: February 27, 2026 12:36 pm IST

(प्रदीप्त तापदार)

कोलकाता, 27 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में 2019 में अपनी चुनावी सफलता, वहीं 2021 में झटका लगने के बाद राज्य में अपनी राजनीतिक रफ्तार को बढ़ाने के लिए ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने जा रही है।

हाल के वर्षों में यह पार्टी का सबसे व्यापक राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान होगा, जिसका उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनाक्रोश को बढ़ाना और विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की जमीनी ताकत को परखना है।

एक मार्च से शुरू होने वाली यह करीब 5,000 किलोमीटर लंबी यात्रा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित होने के एक दिन बाद शुरू होगी। इसका उद्देश्य बूथ स्तर पर किए गए संगठनात्मक काम को बड़े जनसंपर्क अभियान में बदलना है।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान हमारी एक से 1.5 करोड़ लोगों तक सीधे पहुंचने की योजना है।’’

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इसे ‘‘बंगाल में लोकतांत्रिक सुधार का अगला चरण’’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘34 साल के वाम शासन के बाद लोगों ने बदलाव चुना था और अब 15 साल बाद फिर बदलाव की मांग उठ रही है।’’

यह यात्रा कूचबिहार, कृष्णानगर, कुल्टी, गारबेटा, रायदिघी, इस्लामपुर, हासन, संदेशखालि और अमता से शुरू होगी और सभी विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में समाप्त होगी। समापन रैली को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधित करने की संभावना है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दक्षिण 24 परगना के रायदिघी से यात्रा की शुरुआत करेंगे, जिसे तृणमूल का मजबूत गढ़ माना जाता है और जो सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक क्षेत्र है।

राज्य में 2019 में लोकसभा की 18 सीटें जीतने के बाद भाजपा 2021 के विधानसभा चुनाव में सत्ता से तृणमूल को हटाने में असफल रही थी, जिससे पार्टी में आंतरिक मतभेद और संगठनात्मक कमजोरी सामने आई। अब ‘परिवर्तन यात्रा’ को पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि संगठनात्मक परीक्षा भी है।

उन्होंने कहा, ‘‘2021 में चुनाव प्रचार काफी जोरदार था, लेकिन शीर्ष स्तर का था। ‘परिवर्तन यात्रा’ बूथ समितियों, जिला समन्वय की परीक्षा लेती प्रतीत होती है। यह एक राजनीतिक प्रचार के साथ-साथ एक संगठनात्मक कवायद भी है।’’

वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि भाजपा के पास स्थानीय नेतृत्व की कमी है और दिल्ली के नेताओं के सहारे यह अभियान चलाया जा रहा है।

पर्यवेक्षकों के अनुसार, बंगाल की राजनीति में जनयात्राएं हमेशा अहम रही हैं, लेकिन केवल बड़े अभियान से चुनावी सफलता की गारंटी नहीं मिलती। भाजपा के लिए यह यात्रा तभी सफल मानी जाएगी जब यह कार्यकर्ताओं को ऊर्जा दे, मतदाताओं को प्रभावित करे और तृणमूल के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक विकल्प पेश कर सके।

भाषा गोला वैभव

वैभव


लेखक के बारे में