बंगाल : पानीहाटी पर आरजी कर कांड का साया, तृणमूल के गढ में पीड़िता की मां की चुनौती
बंगाल : पानीहाटी पर आरजी कर कांड का साया, तृणमूल के गढ में पीड़िता की मां की चुनौती
(प्रदीप्त तापदार)
पानीहाटी (बंगाल), चार अप्रैल (भाषा) कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक युवा चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के 20 महीने बाद अब इस घटना की राजनीतिक गूंज पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में साफ दिखायी दे रही है।
पानीहाटी एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां लगभग छह दशकों तक सत्ता केवल वामपंथ और कांग्रेस के बीच बदलती रही और बाद में तृणमूल कांग्रेस के पास रही लेकिन अब यहां 29 अप्रैल का मुकाबला महज एक सामान्य चुनाव नहीं रह गया है।
तृणमूल कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले उत्तर कोलकाता के इस उपनगर में मतदाताओं से स्थानीय समस्याओं के बजाय उस सवाल पर अधिक चर्चा हो रही है कि ‘‘आरजी कर पीड़िता के साथ न्याय करने में कौन विफल रहा और अब न्याय कौन दिला सकता है?’’ यह सवाल अगस्त 2024 से बंगाल की राजनीति पर असर डालता रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा मृतक चिकित्सक की मां को उम्मीदवार बनाए जाने, तृणमूल द्वारा तीन दशकों में बने अपने मजबूत गढ़ की रक्षा करने और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा उस विरोध आंदोलन को फिर से अपने पक्ष में लेने की कोशिश के बीच पानीहाटी वह सीट बन गई है जहां बंगाल के सबसे भावनात्मक मुद्दे की सबसे कड़ी राजनीतिक परीक्षा होने जा रही है।
भाजपा ने मृतक महिला चिकित्सक की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और निवर्तमान विधायक निर्मल घोष के बेटे तीर्थंकर घोष से है।
पानीहाटी में अब दांव सिर्फ विधानसभा की एक सीट पर नहीं है, बल्कि इस पर भी है कि कौन-सी पार्टी बंगाल के हाल के सबसे बड़े विरोध आंदोलन और उससे जुड़े गुस्से, दुख और अनुत्तरित सवालों पर अपना दावा पेश कर सकती है।
भाजपा के लिए यह उम्मीदवारी आरजी कर आंदोलन से पैदा हुए आक्रोश और अविश्वास को तृणमूल के खिलाफ वोट में बदलने की कोशिश है।
सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परीक्षा है कि क्या उसका मजबूत संगठनात्मक ढांचा जनाक्रोश की लहर को झेल पाएगा। तृणमूल ने 2011 से इस सीट पर कब्जा बनाए रखा है।
वहीं, माकपा के लिए पानीहाटी एक मौका है उस आंदोलन को फिर से अपने पक्ष में लेने का, जिसे वह मानती है कि भाजपा अब हथियाने की कोशिश कर रही है। माकपा के कार्यकर्ता और छात्र संगठन के सदस्य इस घटना से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरे रहे हैं।
देबनाथ ने कहा, ‘‘अगर मैं लोगों की सेवा कर पाऊं, तो मेरी बेटी भी खुश होगी। मैं चाहती हूं कि पश्चिम बंगाल में कमल खिले और तृणमूल का सफाया हो।’’
उनका राजनीति में प्रवेश नौ अगस्त 2024 की उस घटना के लगभग डेढ़ साल बाद हुआ है, जिसने सिंगूर और नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों के बाद बंगाल में शायद सबसे बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा किया।
कार्यस्थल पर परास्नातक प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या ने देशभर में चिकित्सकों, छात्रों और आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था।
अस्पतालों में हड़ताल हुई। प्रदर्शनकारियों ने रातभर सड़कों पर डेरा जमाए रखा। कोलकाता से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हुए और यह मामला महिलाओं की सुरक्षा तथा सबूतों को नष्ट करने के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।
हालांकि, बंगाल में इस आंदोलन ने जल्द एक तीखा राजनीतिक रूप ले लिया। यह केवल एक पीड़िता के लिए न्याय की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ममता बनर्जी की सरकार की कानून-व्यवस्था, अस्पताल प्रबंधन और प्रभावशाली लोगों को बचाने के संदेह पर व्यापक आरोपों में बदल गया।
अब यही माहौल पानीहाटी पर भारी पड़ रहा है।
मृतका के पिता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि परिवार इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि केवल राजनीतिक बदलाव से ही न्याय मिल सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ भाजपा ही मेरी बेटी को न्याय दिला सकती है और राज्य की महिलाओं को सुरक्षा दे सकती है। हमने शुरू से कहा था कि हम अपनी बेटी की मौत पर राजनीति नहीं होने देंगे, लेकिन वामपंथ ने विरोध के अलावा किया ही क्या?’’
वाम दल ने कलातन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी राजनीति में आ सकता है, हमें इससे कोई समस्या नहीं है। अगर ऐसा कोई हादसा फिर हुआ, तो हम फिर सड़कों को जाम करेंगे, रातभर प्रदर्शन करेंगे। हमें विरोध का रास्ता अपनाने से कोई नहीं रोक सकता। हम न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे।’’
पानीहाटी कभी वामपंथ का गढ़ था। 1967 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद माकपा ने यहां कई बार जीत दर्ज की, केवल दो बार कांग्रेस ने बीच में जीत हासिल की।
निर्मल घोष ने 1996 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी, बाद में वह तृणमूल में शामिल हो गए। इसके बाद 2006 को छोड़कर, उन्होंने 2001, 2011, 2016 और 2021 में लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की।
इस बार घोष ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है और तृणमूल ने उनके बेटे को उम्मीदवार बनाया है।
तीर्थंकर घोष ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तृणमूल पीड़ित परिवार के दुख में साझीदार है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर इस त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।
बहरहाल, इस सीट पर आंकड़े सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में नजर आते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में तृणमूल को लगभग 49.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 34.6 प्रतिशत वोट मिले। यहां तक कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी, जब पूरे बंगाल में भाजपा का उभार दिखा, तब भी तृणमूल ने 41 प्रतिशत से अधिक वोट लेकर आराम से जीत हासिल की थी।
वर्ष 2026 के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, पानीहाटी में 1,97,141 मतदाता हैं। अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से थोड़ी अधिक है, जबकि मुस्लिम मतदाता पांच प्रतिशत से कम हैं, जिससे यह सीट मुख्यतः हिंदू और निम्न-मध्यम व मध्यम वर्गीय उपनगरीय मतदाताओं के प्रभाव में है।
भाषा गोला सुरभि
सुरभि

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