राइटर्स बिल्डिंग में वापस लौटेगा बंगाल सचिवालय: छोटे व्यापारियों को कारोबार फिर से चमकने की उम्मीद

राइटर्स बिल्डिंग में वापस लौटेगा बंगाल सचिवालय: छोटे व्यापारियों को कारोबार फिर से चमकने की उम्मीद

राइटर्स बिल्डिंग में वापस लौटेगा बंगाल सचिवालय: छोटे व्यापारियों को कारोबार फिर से चमकने की उम्मीद
Modified Date: May 11, 2026 / 01:08 pm IST
Published Date: May 11, 2026 1:08 pm IST

(सुदीप्तो चौधरी)

कोलकाता, 11 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल की नयी सरकार द्वारा राज्य सचिवालय को दोबारा ‘राइटर्स बिल्डिंग’ से संचालित करने के फैसले ने कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके के छोटे व्यापारियों में नयी उम्मीद जगा दी है। करीब 13 साल पहले जब राज्य सचिवालय को ‘नबन्ना’ स्थानांतरित किया गया था, तब से इन व्यापारियों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा था।

लगभग 250 साल पुरानी राइटर्स बिल्डिंग के आसपास चाय की दुकान चलाने वाले, छोटे भोजनालयों, फल विक्रेताओं और अन्य दुकानदारों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों और आगंतुकों की वापसी से उनके कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मध्य कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके में चाय की दुकान संचालित करने वाले प्रबीर साहा ने कहा, “जब यहां से राज्य सरकार का कामकाज चलता था, तब हमारे पास बैठने तक का समय नहीं होता था। सुबह से शाम तक सरकारी कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, वकील और दफ्तर आने-जाने वाले लोग हमारी दुकान पर आते थे।”

उन्होंने बताया कि सचिवालय स्थानांतरित होने के कुछ ही महीनों के भीतर बिक्री में भारी गिरावट आई और इलाके की कई दुकानें पूरी तरह बंद हो गईं।

स्वतंत्रता के बाद से 2013 तक राइटर्स बिल्डिंग ही राज्य सचिवालय के रूप में कार्यरत थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे हुगली नदी के दूसरी ओर हावड़ा स्थित 14 मंजिला इमारत ‘नबन्ना’ में स्थानांतरित कर दिया था। व्यापारियों ने याद किया कि कैसे उस समय हजारों कर्मचारियों की आवाजाही से बीबीडी बाग इलाका दिनभर गुलजार रहता था।

बीबीडी बाग के पास एक नाश्ते की दुकान संचालित करने वाली रीना शॉ ने कहा, “पहले हमारे यहां छह कर्मचारी काम करते थे, लेकिन अब केवल मैं और मेरे पति ही दुकान संभालते हैं। ऐसे दिन भी आए जब कच्चे माल की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था। अगर दफ्तर यहां वापस आते हैं, तो यह पूरा इलाका फिर से जीवंत हो जाएगा।”

जेरॉक्स (फोटोकॉपी) और स्टेशनरी दुकान मालिकों के अनुसार, सचिवालय शिफ्ट होने का असर तत्काल और बेहद गंभीर था क्योंकि सरकारी कामकाज से जुड़े कागजात ही उनकी कमाई का मुख्य जरिया थे।

राइटर्स बिल्डिंग के पास जेरॉक्स सेंटर संचालित करने वाले संजय गुप्ता ने कहा, “आवेदन पत्र, हलफनामे, कार्यालयी दस्तावेज और पहचान पत्रों की फोटोकॉपी के लिए यहां भीड़ लगी रहती थी।

एक अन्य फोटोशॉप स्टॉल के मालिक ने बताया कि 2013 के बाद ग्राहक गायब हो गए और इस लाइन की करीब सात-आठ दुकानें किराया और बिजली बिल न भर पाने के कारण बंद हो गईं।

फल विक्रेता अब्दुल रहीम ने कहा कि बीच-बीच में होने वाली प्रशासनिक गतिविधियों के बावजूद इलाके में आने वाले लोगों की संख्या में कभी सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि हजारों कर्मचारियों के आने-जाने का मतलब सभी के लिए व्यापार था, चाहे वह फल वाला हो, सिगरेट की दुकान या फिर सड़क किनारे के फेरीवाले। उन्होंने कहा कि आज आलम यह है कि दोपहर तक कई दुकानों के शटर गिर जाते हैं।

स्थानीय व्यापारिक संघों का अनुमान है कि पिछले एक दशक में घटते ग्राहकों के कारण बीबीडी बाग और उसके आसपास के सैकड़ों छोटे व्यवसाय या तो बंद हो गए या उनका आकार काफी छोटा हो गया।

अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि प्रशासनिक केंद्रों के स्थानांतरण से अनौपचारिक और छोटे पैमाने के वाणिज्य का पूरा व्यावसायिक ढांचा प्रभावित होता है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि राइटर्स बिल्डिंग को स्थायी रूप से दोबारा राज्य सचिवालय का दर्जा दिया जाएगा, जो ब्रिटिश काल के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के सशस्त्र हमलों और कई मुख्यमंत्रियों के शासन की गवाह रही है।

तृणमूल कांग्रेस 2011 में सत्ता में आई थी और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) कुछ समय के लिए यहां रहा था, जिसके दो साल बाद इसे हावड़ा के शिवपुर स्थानांतरित कर दिया गया था।

भाषा सुमित अमित

अमित


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