अमेरिका में भागवत का बयान: विपक्षी दलों ने आरएसएस प्रमुख की कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया

अमेरिका में भागवत का बयान: विपक्षी दलों ने आरएसएस प्रमुख की कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया

अमेरिका में भागवत का बयान: विपक्षी दलों ने आरएसएस प्रमुख की कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया
Modified Date: August 30, 2026 / 10:16 pm IST
Published Date: August 30, 2026 10:16 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) विपक्षी दलों ने विविधता को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अमेरिका में दिए गए बयान को जहां उनकी ‘कथनी और करनी में अंतर’ करार दिया, वहीं भाजपा ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया को बताया है कि हिंदुत्व का वास्तविक अर्थ क्या होता है।

भागवत ने शनिवार को अमेरिका में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और ‘‘इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।’’

भागवत ने कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि भागवत को यह संदेश भाजपा नेताओं और उन संगठनों तक पहुंचाना चाहिए जो ‘‘हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत फैलाते हैं’’।

अमेरिका में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने कहा कि भागवत को ‘‘झूठ बोलना बंद करना चाहिए’’ और आरोप लगाया कि आरएसएस के डीएनए में ‘‘नफरत और सांप्रदायिकता’’ है।

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भागवत के बयानों पर रविवार को तंज कसते हुए कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी बोल रहे थे या संघ प्रमुख।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने भागवत को “बौद्धिक तथा नैतिक रूप से बेईमान न होने” की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विदेश में दिए गए बयानों और भारत में किए जाने वाले कार्यों में समानता होनी चाहिए।

घोष ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘श्रीराम सेना जैसे हिंदुत्ववादी संगठन, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। भाजपा का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है और इसके शीर्ष नेता मुसलमानों के खिलाफ बेहद घृणित भाषा में बयान देते हैं।’’

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी आरएसएस प्रमुख पर जमकर निशाना साधा।

ओवैसी ने कहा, ‘‘यह आरएसएस की पुरानी चाल है: कुछ बातें दुनिया के लिए होती हैं और कुछ उसके अपने सदस्यों के लिए। आरएसएस ने अपने प्रमुख विचारकों और लेखकों के विचारों से कभी खुद को अलग नहीं किया है। वे मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के बारे में क्या कहते हैं?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस लोकतंत्र का विरोध करता है और लगातार तानाशाही की मांग करता रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस के लिए भारतीय मुसलमान और ईसाई क्रमशः नंबर एक और नंबर दो के ‘आंतरिक खतरे’ हैं।’’

माकपा नेता एवं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, ‘‘न्यूयॉर्क में मोहन भागवत “एक मानवता”, समान गरिमा और ऐसे हिंदुत्व की बात करते हैं, जो हर इंसान को स्वीकार करता है। लेकिन देश में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को कथित तौर पर उनकी दलित पहचान के कारण हल्द्वानी में “शुद्धिकरण अनुष्ठान” का सामना करना पड़ता है, जबकि दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हर दिन अत्याचार की खबरें सामने आती हैं।’’

भाजपा नेताओं ने हालांकि भागवत के बयान की सराहना की और अमेरिका से दिए गए उनके संदेश की प्रशंसा की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि सहिष्णुता ही हिंदुत्व की “आत्मा” है।

उन्होंने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि लेकिन सहनशीलता का मतलब यह नहीं है कि हमलों का जवाब न दिया जाए। उन्होंने कहा, “हिंदुत्व की आत्मा क्या है? वह है सहिष्णुता। यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता है… और इसकी वजह यह है कि हमने अपने मूल्यों को इतना मजबूत बनाए रखा कि दुनिया भर से हुए हमलों के बावजूद, हमने उन्हें सहिष्णुता के साथ झेला।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “और हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। हिंदुत्व ने हमें यही सिखाया है। अगर कोई आप पर हमला करता है, तो उसका मुकाबला जरूर करना चाहिए, लेकिन हिंदू कभी पहले हमला नहीं करता। आपने देखा होगा कि हिंदू हमेशा सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करता है।”

भाजपा नेता महेश जेठमलानी ने भागवत के बयान की सराहना की और न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी पर निशाना साधा। ममदानी संघ प्रमुख भागवत की मौजूदा अमेरिका यात्रा से पहले आरएसएस के आलोचक रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ममदानी और उनके जैसे लोगों के लिए, मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख भागवत का संबोधन सचमुच उनके लिए अप्रत्याशित था और इसने नफरत फैलाने वाले न्यूयॉर्क मेयर के फर्जी खबरें फैलाने वाले तंत्र को करारा जवाब दिया।’’

भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने भी भागवत के बयान की सराहना करते हुए कहा, “भारत दुनिया को दिखाता है कि विविधता हमें विभाजित नहीं करती… बल्कि हमारी एकता को सुशोभित करती है, ऐसा परम पूज्य सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा।’’

भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भागवत ने अमेरिका से एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश दिया कि भारत में रहने वाले सभी लोग मिल-जुलकर रहेंगे।

कई विपक्षी नेताओं ने भागवत पर विदेश में अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया।

आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भागवत को विविधता का यह संदेश अपने मुख्यमंत्रियों और अनुराग ठाकुर तथा कपिल मिश्रा जैसे नेताओं तक भी पहुंचाना चाहिए।

भारद्वाज ने कहा, ‘‘उन्हें हिमंत विश्व शर्मा, योगी आदित्यनाथ और शुभेंदु अधिकारी से यह बात कहनी चाहिए, जो अक्सर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने वाले बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। अगर मोहन भागवत के विचारों में वास्तव में बदलाव आया है, तो हम इसका स्वागत करते हैं।’’

शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने कहा कि भागवत को ऐसा बयान अमेरिका के बजाय भारत में देना चाहिए।

कांग्रेस नेता एवं कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों से यह अपंजीकृत संगठन भारत में हिंदू राष्ट्र के विचार का प्रचार करता आया है और अब भी कर रहा है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मनोज कुमार झा ने कहा कि अगर मैडिसन स्क्वायर आरएसएस प्रमुख को यह एहसास करा सकता है कि भारत सभी का है, तो ‘‘इस समझ को भारत वापस लाया जाना चाहिए’’।

झा ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘यही सबक मोदी जी के मंत्रिमंडल के हर मंत्री और हर मुख्यमंत्री के लिए अनिवार्य होना चाहिए कि भारत सभी भारतीयों का है। मुसलमान अपने ही देश में मेहमान नहीं हैं। जय हिंद।’’

भाषा देवेंद्र सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में