भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में न्यायालय ने अदालत से मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर विचार करने को कहा
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में न्यायालय ने अदालत से मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर विचार करने को कहा
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य में विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरों सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए जा रहे सर्वे से संबंधित मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार करेगा।
उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया, हालांकि इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण से संबंधित सभी आपत्तियों पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार सुनवाई होनी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और हिंदू पक्षों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं बरुण सिन्हा और विष्णु शंकर जैन की दलीलें सुनीं।
खुर्शीद ने सुनवाई की शुरुआत में ही साक्ष्यों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने कई आपत्तियां उठाई हैं। हम अनुरोध करते हैं कि सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें हमें सौंपी जाएं ताकि हम अपनी आपत्तियों को ठीक से प्रस्तुत कर सकें।’’
पीठ ने गौर किया कि उच्च न्यायालय इन आपत्तियों के लिए प्रक्रियात्मक समयसीमा पर पहले ही विचार कर चुका है।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में कुछ आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य पर अभी विचार किया जाना बाकी है।
उन्होंने कहा कि संबंधित वीडियो अदालत में चलाई जाएगी, जिससे सभी पक्षों को इसकी सत्यता पर आपत्ति जताने का मौका मिलेगा।
प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्देशों का हवाला दिया और कहा कि उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित किया था और कहा था कि वह अंतिम सुनवाई के चरण में आपत्तियों पर सुनवाई करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने हमारे पूर्व निर्देशों का पालन करते हुए आदेश पारित किया है। हमें पूरा विश्वास है कि उच्च न्यायालय वीडियोग्राफी का अवलोकन करने के बाद प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार आपत्तियों पर विचार करेगा।’’
पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और पक्षकार किसी भी शिकायत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं।
भाषा शफीक रंजन
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