भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद: न्यायालय में निरीक्षण के खिलाफ अर्जी पर बुधवार को सुनवाई

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद: न्यायालय में निरीक्षण के खिलाफ अर्जी पर बुधवार को सुनवाई

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद: न्यायालय में निरीक्षण के खिलाफ अर्जी पर बुधवार को सुनवाई
Modified Date: March 31, 2026 / 06:25 pm IST
Published Date: March 31, 2026 6:25 pm IST

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय बुधवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा,जिसमें कहा गया है कि एएसआई संरक्षित संरचना से संबंधित ‘कई विवादों’ के मद्देनजर वह दो अप्रैल से पहले धार में भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का निरीक्षण करेगा।

उच्चतम न्यायालय में बुधवार को सुनवाई के लिए आने वाले मामलों की सूची के मुताबिक प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई कर सकती है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 16 मार्च को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर से संबंधित याचिकाओं की नियमित सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की थी और कहा था कि वह स्थल का निरीक्षण करेगी।

उच्च न्यायालय के दोनों न्यायाधीशों ने 28 मार्च को धार स्थित परिसर का निरीक्षण किया। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति शुक्ला और न्यायमूर्ति अवस्थी अपराह्न लगभग 1:50 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और 2:45 बजे तक परिसर में रहे।

हिंदू पक्ष भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं शताब्दी का यह स्मारक कमाल मौला मस्जिद है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल, 2003 के एक आदेश के अनुसार, हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को परिसर में पूजा करने की अनुमति है जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को वहां नमाज अदा कर सकते हैं।

उच्च न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी की थी, ‘‘कई विवादों के मद्देनजर, हम परिसर का दौरा करना और उसका निरीक्षण करना चाहेंगे। हम अगली तारीख (2 अप्रैल) से पहले परिसर का दौरा करेंगे।’’

पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया था कि इस निरीक्षण के दौरान मामले से जुड़े किसी भी पक्ष को विवादित स्थल पर उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

धार में विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है, जिसने उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद इसका वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया और एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

एएसआई की दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विवादित स्थल पर पहले धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना थी और वर्तमान विवादित ढांचा प्राचीन मंदिरों के कुछ हिस्सों का पुन: उपयोग करके बनाया गया है।

मुस्लिम पक्ष ने हालांकि इस दावे का खंडन किया है और सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि एएसआई ने उनकी पहले की आपत्तियों को नजरअंदाज किया और सर्वेक्षण में ‘विवादित परिसर में रखी वस्तुओं’ को शामिल किया।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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