लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयक पेश किए गए
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयक पेश किए गए
( तस्वीर सहित )
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किया।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया।
‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े।
इससे पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इन्हें पेश करने के समय पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि वास्तव में विधेयक इस समय लाने का क्या मकसद है।
उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था तो सरकार ने उसी समय इसे लागू क्यों नहीं किया?
वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आप 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर डरे हुए हैं। आप असंवैधानिक विधेयक ला रहे हैं। इन्हें वापस लिया जाना चाहिए।’’
समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने सवाल किया कि सरकार को इन विधेयकों को लाने की इतनी जल्दीबाजी क्यों हैं?
सपा के धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए कहा ‘‘मैं संवैधानिक आधार पर इनका पुरजोर विरोध करता हूं। संसद की जिम्मेदारी संविधान की सुरक्षा की है। लेकिन इन विधेयकों से संविधान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिस तरह परिसीमन को जनगणना से अलग किया जा रहा है, वह संविधान की भावना के विरुद्ध है।’’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक पेश किए जाने से पहले इनके गुण-दोषों पर चर्चा नहीं हो सकती और सदस्य अभी केवल तकनीकी आधार पर आपत्ति जता सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अभी सदस्यों को केवल इस बारे में आपत्ति जतानी चाहिए कि विधेयक पुरस्थापित किए जा सकते हैं या नहीं।
शाह ने अध्यक्ष ओम बिरला से कहा, ‘‘आप विधेयकों पर चर्चा के समय विपक्ष को पूरा मौका देना, हम भी कसकर जवाब देंगे।’’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदस्य विधेयक पर चर्चा के समय अपनी आपत्तियां जता सकते हैं।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ करार दिया।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, परिसीमन के लिए लाया गया है और यही मूल आपत्ति है।
द्रमुक नेता टी आर बालू ने तीनों विधेयकों को ‘सैंडविच विधेयक’ करार देते हुए कहा कि तीनों विधेयक एक दूसरे से जुड़े हैं और सरकार को अलग-अलग विधेयक लाने चाहिए थे।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही महिला आरक्षण लागू कर सकती थी।
एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इन विधेयकों के पारित होने से हिंदी पट्टी से संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, वहीं दक्षिणी राज्यों में जनता का प्रतिनिधित्व कम होगा।
उन्होंने सरकार पर संघीय ढांचे का उल्लंघन करने का और ओबीसी तथा मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश का भी आरोप लगाया।
शाह ने कहा कि महिला आरक्षण को तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए तीनों विधेयक साथ में जरूरी हैं और इसलिए इन्हें साथ में लाया गया है।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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