नौकरी और कौशल विकास मिशन के प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायक ने योगी आदित्यनाथ, केंद्र को लिखा पत्र

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नौकरी और कौशल विकास मिशन के प्रस्ताव को लेकर भाजपा विधायक ने योगी आदित्यनाथ, केंद्र को लिखा पत्र

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  • Publish Date - August 9, 2026 / 09:17 PM IST,
    Updated On - August 9, 2026 / 09:17 PM IST

लखनऊ/दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के एक भाजपा विधायक ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए पांच सूत्री कार्ययोजना अपनाने की मांग की।

लखनऊ में सरोजिनी नगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को लिखे पत्र में कम से कम छह महीने तक हर महीने कौशल एवं रोजगार मेला आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि इन मेलों में युवाओं को ‘वॉक-इन इंटरव्यू’ की सुविधा दी जा सकती है और संभव हो तो मौके पर ही चयन किया जा सकता है।

प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व अधिकारी ने अपने चार पन्नों के पत्र में कहा कि अगर इस योजना को लागू करने के बाद उसके परिणामों को आंकड़ों और ठोस उपलब्धियों के आधार पर परखा जाए और इसके अच्छे नतीजे सामने आते हैं, तो बाद में इसे पूरे देश में लागू करने पर विचार किया जा सकता है।

भर्ती प्रक्रिया में ‘‘मानवीय संवेदना’’ की वकालत करते हुए विधायक ने कहा कि भर्ती के दौरान केवल इसलिए युवाओं को तुरंत खारिज नहीं करना चाहिए कि उनमें किसी खास कौशल की कमी है। नियोक्ताओं को पहले उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर अपनी योग्यता सुधारने का मौका देना चाहिए।

उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘भारतीय युवाओं का प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, रोजगार, कौशल उन्नयन और पुनः कौशल विकास उद्योग जगत के प्रमुखों द्वारा राष्ट्र निर्माण के प्रति पवित्र दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए।’’

विधायक ने नियमित रूप से सरकार-उद्योग जगत-शिक्षा जगत के बीच रोजगार और कौशल संबंधी गोलमेज बैठकों के आयोजन की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ), विश्वविद्यालयों और कौशल संस्थानों की भागीदारी होनी चाहिए, ताकि अगले तीन से पांच वर्षों के लिए आवश्यक मानव संसाधन और कौशल की जरूरतों का अनुमान लगाया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन उम्मीदवारों का चयन नहीं हो पाता, उन्हें अगली संभावना के लिए कौशल मूल्यांकन, ब्रिज कोर्स, अप्रेंटिसशिप और प्रशिक्षण से जोड़ा जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के व्यापक स्तर पर काम करने की क्षमता, शिक्षा जगत के ज्ञान और उद्योग जगत के नेतृत्व, जिम्मेदारी तथा मानवीय संवेदना का मेल भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को वास्तविक रोजगार लाभांश में बदल सकता है।’’

भाषा गोला प्रशांत

प्रशांत