नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का प्रदर्शन आम आदमी पार्टी (आप) का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाने के लिए चलाई गई “खास मुहिम” थी।
भाजपा ने इस दौरान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भी उन पर निशाना साधा।
भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर दावा किया कि इस प्रदर्शन का शिक्षा सुधारों या नीट प्रश्नपत्र लीक मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
मालवीय ने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें केजरीवाल को कथित तौर पर हिंदी में यह कहते सुना जा सकता है, “इस बार जितने लोग आए थे सड़कों पर, वो किस लिए आए थे? वो केवल मुझे नहीं लगता कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने आए थे। मतलब अगर मैं ‘अशिष्ट’ भाषा में बोलूं, तो मोदी जी को ठोकने आए थे।”
‘पीटीआई’ वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। भाजपा के आरोप पर आप या केजरीवाल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
भाजपा के कई नेताओं ने मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर आप नेता की आलोचना की। भाजपा के इन नेताओं ने पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी शामिल थे।
भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “केजरीवाल ने आखिरकार अपने खाम मुहिम -कॉकरोच जनता पार्टी—का खुलासा कर दिया है। एजेंडा कभी जवाबदेही या शिक्षा सुधार नहीं था। पहले दिन से इसका मकसद केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाना था।”
मालवीय ने आरोप लगाया कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि छात्रों के नाम पर जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन वास्तव में प्रधानमंत्री को निशाना बनाने के उद्देश्य से चलाया गया प्रायोजित राजनीतिक अभियान था और इसका शिक्षा सुधारों या नीट से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने कहा कि कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके और “उनके गैंग” के आप से गहरे संबंध होने की बात हमेशा स्पष्ट थी।
मालवीय ने आरोप लगाया, “लेकिन प्रदर्शन के बाद कॉकरोच बेकाबू हो गए, उन्होंने अरविंद के फोन उठाने बंद कर दिए और असुरक्षित महसूस कर रहे केजरीवाल को प्रदर्शन के असली मकसद का खुलासा करने के लिए मजबूर कर दिया।”
उन्होंने कहा, “आपके बच्चों को ‘आप’ और कांग्रेस के राजनीतिक एजेंडे के लिए मोहरा बनाया गया। इसे कभी मत भूलिए। उन्हें चोट लग सकती थी, वे हिंसा में फंस सकते थे या उनका जीवन बर्बाद हो सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसका श्रेय कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा दिखाए गए अनुकरणीय संयम को जाता है।”
मालवीय ने उन लोगों को भी बेनकाब करने की मांग की, जिन्होंने प्रदर्शन का नेतृत्व करने का दिखावा किया, लेकिन खुद को और अपने प्रायोजकों को बचाने के लिए सही समय पर इससे किनारा कर लिया, जैसे ‘‘राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल।’’
भाजपा की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने भी केजरीवाल की कथित टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल द्वारा आंदोलन को “हड़पकर राजनीतिक अवसर” में बदलने की कोशिश करने से पहले तक छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
मालीवाल ने ‘एक्स’ पर केजरीवाल की कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा, “अरविंद केजरीवाल एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘जो लोग सड़क पर आए थे, वो मोदी जी को ठोकने आए थे।’ यह कैसी भाषा है? वह भारत के तीन बार निर्वाचित प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश के बारे में सहजता से मजाक कर रहे हैं। क्या उन्हें पता भी है कि वह क्या कह रहे हैं?”
उन्होंने आरोप लगाया, “पहले उन्होंने कॉजपा की स्थापना, वित्तपोषण और निर्देशन किया, फिर छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को हड़प लिया और उसे हिंसक बनाने की कोशिश की, जैसा बांग्लादेश और नेपाल में हुआ था!… उनकी तानाशाही प्रवृत्तियां खुलकर सामने आ गई हैं और स्पष्ट है कि सत्ता हासिल करने के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे लोग लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।”
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने प्रधानमंत्री के बारे में “माओवादी शैली की भाषा” का इस्तेमाल करने के लिए केजरीवाल की आलोचना की।
मिश्रा ने ‘एक्स’ पर कहा, “यह किसी ‘क्रांतिकारी विद्रोह’ का प्रतीक नहीं है, बल्कि उनकी नैतिक और भाषाई दिवालियापन की अंतिम, हताश चीख है।”
भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने भी केजरीवाल की कथित टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि इससे उनकी मानसिक स्थिति का पता चलता है।
भाजपा के पूर्व दिल्ली अध्यक्ष ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “दिल्ली की जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने उनके भ्रष्टाचार का भी जवाब दिया है। और जिस तरह वह अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए पंजाब की जनता के कर के पैसे को लूट रहे हैं, पंजाब की जनता भी उन्हें करारा जवाब देगी।”
भाषा अमित संतोष
संतोष