भाजपा ने पंचायत चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए हिमाचल विधानसभा से बहिर्गमन किया

भाजपा ने पंचायत चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए हिमाचल विधानसभा से बहिर्गमन किया

भाजपा ने पंचायत चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए हिमाचल विधानसभा से बहिर्गमन किया
Modified Date: April 1, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: April 1, 2026 10:09 pm IST

(तस्वीर के साथ)

शिमला, एक अप्रैल (भाषा) हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को उस समय हंगामा देखने को मिला, जब विपक्षी दल भाजपा ने पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण सूची में बदलाव किए जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग की।

हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।

हालांकि, जब सरकार ने नियम 67 के तहत मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव की विपक्ष की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो विपक्षी सदस्यों ने बहिर्गमन किया।

भाजपा की ओर से पार्टी विधायक रणधीर शर्मा ने स्थगन प्रस्ताव दिया था।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी कि वह प्रश्नकाल के बाद अपना निर्णय सुनाएंगे, लेकिन विपक्ष ने प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करने पर जोर देना जारी रखा, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

भाजपा विधायकों ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस हालिया अधिसूचना को लेकर विरोध जताया, जिसमें जिला आयुक्तों को पांच प्रतिशत तक पंचायतों के लिए आरक्षण सूची में बदलाव करने का अधिकार दिया गया है। विधायकों ने इसे स्थानीय निकाय चुनाव टालने का प्रयास करार दिया।

भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जिला आयुक्तों को आरक्षण सूची में पांच प्रतिशत तक समायोजन करने का अधिकार देने वाली अधिसूचना जारी की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनाव में देरी करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रही है तथा मुख्यमंत्री अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

इस कदम को ‘‘अनुचित’’ करार देते हुए ठाकुर ने दावा किया कि इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

राज्य में पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव 31 मई से पहले होने प्रस्तावित हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार आयोजित किए जाएंगे।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने पुष्टि की कि राज्य में पंचायत चुनाव 31 मई से पहले ही होंगे।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पंचायत चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर आयोजित किए जा रहे हैं, और परिणामस्वरूप, विभिन्न जातियों और समुदायों की जनसंख्या जनसांख्यिकी में परिवर्तन हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत संशोधन की अनुमति देने वाला प्रावधान इसलिए शामिल किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि किसी विशिष्ट समुदाय को जनसंख्या स्थानांतरण के कारण अन्याय का सामना करना पड़ा है, तो ‘रोस्टर’ में आवश्यक समायोजन किया जा सके।

भाषा शफीक राजकुमार

राजकुमार


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