गोवा में बजट सत्र छोटा किया गया: विपक्ष ने राज्यपाल से विधानसभा सत्र पुन: बुलाने का आग्रह किया

गोवा में बजट सत्र छोटा किया गया: विपक्ष ने राज्यपाल से विधानसभा सत्र पुन: बुलाने का आग्रह किया

गोवा में बजट सत्र छोटा किया गया: विपक्ष ने राज्यपाल से विधानसभा सत्र पुन: बुलाने का आग्रह किया
Modified Date: March 18, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: March 18, 2026 3:22 pm IST

पणजी, 18 मार्च (भाषा) गोवा में विपक्षी दलों कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और रिवॉल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (आरजीपी) के विधायकों ने राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू से बुधवार को मुलाकात कर बजट सत्र की अवधि को कम किए जाने का विरोध किया और विधानसभा सत्र फिर से बुलाए जाने की मांग की।

दक्षिण गोवा जिले की पोंडा विधानसभा सीट के लिए नौ अप्रैल को उपचुनाव होने हैं और इसके लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद बजट सत्र को सोमवार को संक्षिप्त कर दिया गया था। यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं विधायक रवि नाइक के निधन के कारण कराया जा रहा है।

सत्र स्थगित होने से पहले सदन में राज्य का बजट पारित हो गया। छह मार्च को शुरू हुआ यह सत्र मूल रूप से 27 मार्च को समाप्त होना था।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सत्र को छोटा करके सरकार ने गोवा के लोगों को जवाबदेही के उनके अधिकार से वंचित कर दिया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यूरी अलेमाओ, ‘आप’ के विधायकों वेंजी वीगास एवं क्रूज सिल्वा तथा आरजीपी के विधायक वीरेश बोरकर सहित विपक्षी सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार सुबह लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की।

अलेमाओ ने राज्यपाल के आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि महाराष्ट्र एवं ओडिशा में विधानसभा सत्र जारी हैं जबकि वहां भी उपचुनावों की घोषणा भी की गई है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘क्या हम भारत का हिस्सा नहीं हैं? क्या हम भारत के संविधान का पालन नहीं कर रहे?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ने निजी सदस्यों के उन विधेयकों को पारित होने से रोकने के लिए विधानसभा सत्र की अवधि को कम कर दिया जिसका उद्देश्य जमीन की बिक्री रोकना और प्रकृति का संरक्षण करना था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने राज्यपाल से संविधान के अनुच्छेद 175 के तहत विधानसभा सत्र फिर से बुलाने का अनुरोध किया है। अगर सरकार इससे इनकार करती है, तो राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 356(1) के तहत सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार है।’’

बोरकर ने कहा कि उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पहले ही पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि क्या आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद विधानसभा सत्र छोटा किया जाना जरूरी है।

उन्होंने दावा किया कि जब भी विपक्षी सदस्य सरकार के ‘‘तानाशाहीपूर्ण’’ रवैये का विरोध जताते थे, तो उन्हें विधानसभा से अक्सर बाहर निकलवा दिया जाता था।

आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक वीगास ने कहा कि अगर राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग स्वीकार नहीं करते तो विपक्षी सदस्य इस मामले में हस्तक्षेप की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील करने को मजबूर होंगे।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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