बुलडोजर हमेशा डर का प्रतीक नहीं है, यह भ्रष्टाचार दूर करने के लिए परिवर्तन का प्रतीक है: दिलीप घोष
बुलडोजर हमेशा डर का प्रतीक नहीं है, यह भ्रष्टाचार दूर करने के लिए परिवर्तन का प्रतीक है: दिलीप घोष
कोलकाता, छह मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ भाजपा नेता और नवनिर्वाचित विधायक दिलीप घोष ने बुधवार को कहा कि ‘बुलडोजर’ डर या घबराहट का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था को साफ करने के लिए ‘परिवर्तन’ का प्रतीक है।
खड़गपुर सदर सीट से निर्वाचित हुए घोष ने कहा कि नई सरकार किसी भी तरह की हिंसा से सख्ती से निपटेगी। उन्होंने कहा कि यह जनादेश शांति, प्रगति और विकास के लिए है तथा यह सब ममता बनर्जी सरकार के 15 साल के ‘कुशासन और अत्याचारों’ के बाद आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘बुलडोज़र विकास की राह में आने वाली रुकावटों को हटाने का प्रतीक है। बुलडोज़र ‘परिवर्तन’ लाने के लिए है। बुलडोज़र भ्रष्टाचार को, महिलाओं और राज्य के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को कुचल देगा और उन अपराधियों के कुकर्मों के खिलाफ न्याय दिलाएगा जिन्होंने अपराध किए हैं। बुलडोज़र को डर और आशंका से नहीं जोड़ा जा सकता।’’
हालांकि, घोष ने अपनी इन टिप्पणियों को मंगलवार रात ‘न्यू मार्केट’ इलाके में जीत के जश्न के दौरान एक ढांचे को गिराने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए बुलडोज़र की घटना से नहीं जोड़ा। विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गयी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह भाजपा कार्यकर्ताओं की करतूत थी।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर चलती है और किसी भी शांतिप्रिय भारतीय नागरिक के साथ कभी कोई भेदभाव नहीं करेगी।
उन्होंने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल के हमलों में लगभग 300 भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मारे गये।
घोष ने कहा, ‘‘हम बदला में नहीं, बल्कि बदलाव में विश्वास रखते हैं।’’
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘तृणमूल नेताओं, जैसे फिरहाद हाकिम और कुणाल घोष के शब्दों की तुलना करें; इन्होंने हमारे लोगों की हत्याओं को ‘जनरोष’ (लोगों का गुस्सा) बताकर सही ठहराया था। तृणमूल नेता—कृपया अब और भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल न करें। याद रखें, कल न्यू टाउन में हमारे एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी। हम अपने लोगों से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। और हम ऐसा करेंगे भी—लेकिन कृपया हमारे सब्र की सीमा को पार करने पर हमें मजबूर न करें।’’
घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल के कुछ सदस्य अपने ही समर्थकों पर हमला कर रहे थे और इसका दोष भाजपा पर मढ़ रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियां, उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी भले ही उनका किसी भी राजनीतिक दल से संबंध हो।
जब उनसे तृणमूल प्रमुख और निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस टिप्पणी, कि वोटों की लूट हुई है और इसलिए वह अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा नहीं देंगी, के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता का नशा उनके सिर चढ़ गया है, लेकिन कुछ ही दिनों में यह उतर जाएगा, क्योंकि संवैधानिक रूप से लोगों का जनादेश खोने के बाद उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं होगी।’’
भाषा
राजकुमार माधव
माधव

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